विशेष जांच टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण किया
कोलकाता। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गापूजा मंडप में 17 अक्टूबर की रात हुई भगदड़ शुरू होने से ठीक पहले माइक से मंडप ढहने की आशंका जताते हुए कथित भ्रामक घोषणा करने के मामले में चोरबागान पूजा समिति के सदस्य सेंटू को नदिया से हिरासत में लिया गया है। घटना के बाद से ही वह फरार था। उसे कोलकाता पुलिस के मुख्यालय लालबाजार लाया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि घोषणा किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर की गई थी। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 25 लोग घायल हुए थे।
गुरुवार को कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआइटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के लिए मंडप परिसर की 3डी स्कैनिंग की गई, ताकि उसकी बनावट, प्रवेश और निकास द्वारों की चौड़ाई तथा भीड़ की आवाजाही की स्थिति का आकलन किया जा सके। इस बीच, कोलकाता पुलिस के फोरेंसिक विशेषज्ञ एसआइटी के सदस्यों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। जांचकर्ताओं ने मंडप परिसर की बनावट और प्रवेश-निकास के रास्तों का बारीकी से निरीक्षण किया।
मंडप को अधिक समय तक उसी स्थिति में रखना संभव नहीं होने के कारण उसे हटाने से पहले जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। 3डी स्कैनिंग से प्राप्त विवरण आगे की जांच में घटनास्थल की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करेंगे।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के साथ मौके पर मौजूद नागरिक स्वयंसेवकों और पूजा समिति के सदस्यों से भी पूछताछ की, ताकि भगदड़ से पहले और उसके दौरान की घटनाओं का क्रम तैयार किया जा सके। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बारिश के दौरान मंडप के भीतर और बाहर भीड़ की स्थिति बिगड़ने लगी थी। बाहर मौजूद लोग बारिश से बचने के लिए भीतर जाना चाह रहे थे, जबकि अंदर मौजूद लोग भी बारिश के कारण बाहर निकलने से बच रहे थे। इसी बीच मंडप ढहने की आशंका जताते हुए कथित घोषणा की गई, जिसके बाद लोगों में घबराहट फैल गई और वे बाहर निकलने के लिए तेजी से बढ़े। इसी अफरातफरी में भगदड़ मच गई।
पुलिस ने मामले में पहले गिरफ्तार सात लोगों से पूछताछ के दौरान सेंटू का नाम सामने आने के बाद उसे हिरासत में लिया है। उससे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि घोषणा किसके कहने पर की गई और उस समय वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस ने अभी तक हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
न्यायिक जांच दल ने भी अपना काम शुरू किया
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुरूप राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है। इस दल में आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव, स्पेशल टास्क फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि, गृह विभाग के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का एक प्रतिनिधि शामिल है। जांच दल की मुखिया पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन दल निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने का प्रयास करेगा। जांच में भगदड़ की वजह, मौके पर मौजूद लोगों की संख्या, निर्धारित सुरक्षित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति और आयोजकों व संबंधित एजेंसियों की तैयारियों की पड़ताल की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, फोरेंसिक साक्ष्य, कॉल रिकार्ड, पुलिस नियंत्रण कक्ष के दस्तावेज, चिकित्सा रिकार्ड और आपात सेवाओं की प्रतिक्रिया भी जांच के दायरे में होगी। जांच दल का उद्देश्य हादसे की परिस्थितियों का पता लगाने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाना और जिम्मेदारी तय करने में मदद करना है। टीम को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।














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