कोलकाता : आंध्र प्रदेश लॉरी ओनर्स एसोसिएशन (APLOA) ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) से असम-पश्चिम बंगाल सीमा पर 300 से अधिक ट्रकों को रोके जाने के मामले में दखल देने की अपील की है। द हिंदू में प्रसारित इस खबर में बताया गया है कि एसोसिएशन का आरोप है कि कच्चे पेट्रोलियम कोक (raw petroleum coke) ले जा रहे इन ट्रकों को तब रोका गया है, जब वे GST नियमों का पालन कर चुके हैं और इंटीग्रेटेड GST (IGST) का भुगतान भी कर चुके हैं।
एसोसिएशन के महासचिव वाई.वी. ईश्वर राव ने बताया, “ये ट्रक कई दिनों से फंसे हुए हैं, जिससे आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में सामान की आवाजाही बाधित हो रही है।” उन्होंने बताया कि लगभग 50% ट्रकों में विशाखापत्तनम के लिए सामान लदा है, जबकि बाकी ट्रक पश्चिम बंगाल के हल्दिया और दुर्गापुर, बिहार के बरौनी और ओडिशा के पारादीप जा रहे थे। श्री ईश्वर राव ने कहा कि ट्रकों को रोके जाने से ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और औद्योगिक इकाइयों को आर्थिक नुकसान हुआ है, साथ ही ड्राइवरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रक मालिकों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। विजयवाड़ा के एक लॉरी मालिक पी. वेंकट शिव नागराजू ने बताया कि उनके तीन नए ट्रक पश्चिम बंगाल सीमा पर एक चौकी पर एक महीने से अधिक समय से रोके गए हैं। उन्होंने कहा, “अब तक मुझे हर ट्रक पर 2 लाख रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हो चुका है।” उन्होंने बताया कि इन तीन ट्रकों में असम के बोंगाईगांव, गुवाहाटी और डिगबोई स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की रिफाइनरियों से कच्चा तेल (crude oil) लदा था। उन्होंने आगे कहा कि ड्राइवर अपने परिवारों से दूर फंसे हुए हैं और भारी मानसिक व भावनात्मक तनाव से गुजर रहे हैं।
IOC के मार्केटिंग डिवीजन (पूर्वी क्षेत्र) द्वारा उपलब्ध कराई गई वाहनों की सूची के आधार पर, श्री ईश्वर राव ने ‘रेन CII कार्बन (विजाग) लिमिटेड’ (विशाखापत्तनम) के लिए कच्चा पेट्रोलियम कोक ले जा रहे 16 ट्रकों का विवरण साझा किया। उन्होंने अधिकारियों से इन वाहनों की स्थिति की जांच करने और यदि उन्हें बिना किसी कानूनी आधार के रोका गया है, तो उन्हें तुरंत छोड़ने की व्यवस्था करने का आग्रह किया। ट्रक AP39VW-1447 में ले जाए जा रहे माल के ई-वे बिल का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया कि इसमें घोषित कर योग्य मूल्य ₹17.28 लाख है और 18% की दर से IGST ₹3.11 लाख है।
उन्होंने कहा, “इस माल का इनवॉइस IOC, असम द्वारा रेन CII कार्बन (विजाग) लिमिटेड के नाम जारी किया गया था, और इसमें ट्रांसपोर्टर के तौर पर शिवा ट्रांसपोर्ट एजेंसी का नाम दर्ज है।” उन्होंने कहा कि वैध कर दस्तावेज होने का मतलब यह नहीं है कि माल की कानूनी जांच नहीं की जा सकती, लेकिन बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, या बिना कारण बताए और लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी दिए, माल को लंबे समय तक रोक कर रखना उचित नहीं है।
उन्होंने अनुमान लगाया कि इस देरी के कारण ट्रांसपोर्ट उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों को लगभग ₹1 करोड़ का नुकसान (डेमरेज) उठाना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की लंबी देरी से औद्योगिक उत्पादन बाधित हो सकता है और माल भेजने वालों (कंसाइनर) तथा माल प्राप्त करने वालों (कंसाइनी) की लागत बढ़ सकती है।
श्री ईश्वर राव ने बताया कि एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर 300 से अधिक ट्रकों को रोके जाने की तुरंत समीक्षा करने, आंध्र प्रदेश जा रहे 16 वाहनों की जांच करने, और किसी भी वाहन को रोके जाने के पीछे के कानूनी आधार तथा लिखित आदेशों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने संबंधित राज्यों के GST अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की भी वकालत की, ताकि एक समान दिशा-निर्देश लागू किए जा सकें और वैध दस्तावेज वाले वाहन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकें।
असम-बंगाल सीमा पर 300 ट्रक फंसे; केंद्र से दखल देने की मांग














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