नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 14 अक्टूबर को दिल्ली में ऋतु बराला समेत NSUI की उन छात्राओं के साथ प्रेस के सामने आए जिन्हें धरना प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस टॉर्चर सहना पड़ा। यह आयोजन प्रेस को प्रदर्शन के दौरान की गई पुलिस कार्रवाई का सच बताना था। इस अवसर पर राहुल गांधी ने पुलिस पर बेवजह हिंसा करने के आरोप लगाए।
नेहा बोरा को आगे रख रहे हैं राहुल
राहुल गांधी ने वामपंथी छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को अपनी बात रखने का अवसर दिया। धरना प्रदर्शन को लेकर 13 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने नेहा बोरा को बोलने के लिए अलग से पूरा समय दिया। 12 अक्टूबर को जब राहुल गांधी ने ‘दिल्ली चलो’ नाम से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला तब भी नेहा बोरा उनके साथ चल रही थीं। पूरे मार्च के दौरान राहुल भीड़ से नेहा को प्रोटेक्ट करते दिखे। नेहा के आसपास जब कर्नाटक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहुंचे तब भी उन्होंने अपनी पार्टी के सीएम को धक्का देकर हटाने में गुरेज नहीं की। राहुल पूरे यात्रा में नेहा को प्रियंका गांधी के आस-पास और अपने सुरक्षा घेरे के अंदर रखने की कोशिश करते दिखे। इसके अलावा मार्च में चल रही खुली ट्रक पर इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं को जगह दी गई थी, वहां भी छात्र नेता नेहा बोरा को जगह दी गई थी। इसके अलावा पिछले कुछ समय से जहां कहीं भी राहुल गांधी जाते हैं वहां वह नेहा बोरा को पूरा सम्मान देते दिखते हैं।
कैसे चर्चा में आईं नेहा बोरा
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा जेएनयू की रिसर्च स्टूडेंट हैं। मूलरूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली नेहा सबसे पहले नीट पेपर लीक के खिलाफ शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में Gen-Z की ओर से शुरू किए गए अनशन के समय लाइमलाइट में आईं। शुरुआत में इस आंदोलन में सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू किया था, लकिन जब उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया तो नेहा बोरा ने अनशन शुरू कर दिया था। इस दौरान उनका करीब सात किलो वजह भी घट गया था।
















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