हाईलाइट्स :
- ममता बनर्जी ने सुरक्षा बलों पर बदसलूकी का आरोप लगाया
- ममता बनर्जी ने कोलकाता लौटने का कार्यक्रम रद्द किया
- वोटर लिस्ट में सुधार के समर्थन में आए पूर्व जज और नौकरशाह
नई दिल्ली : दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार ममता बनर्जी और कई अन्य बड़े नेताओं को रिहा कर दिया गया है। शनिवार को ममता बनर्जी साउथ एवेन्यू बस स्टैंड के पास सड़क पर धरने पर बैठी थीं। रिहा होने के बाद बंगाल की पूर्व मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा – “हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। ऐसा लगा कि किडनैप कर लिया हो, 2 घंटे तक घुमाती रही पुलिस’“ उन्होंने कोलकाता वापसी के कार्यक्रम में बदलाव किया है और अब वह कांग्रेस के नेतृत्व में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भी शामिल होंगी।
प्राप्त सूचना के अनुसार INDIA ब्लॉक 12 अक्टूबर को राजधानी में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में है। TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता लौटने का कार्यक्रम रद्द कर दिल्ली में रुकने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि ममता बनर्जी भी इसमें शामिल होंगी।
ज्ञानेश कुमार के समर्थन में आए 42 भूतपूर्व जज और 124 नौकरशाह
चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट में सुधार की उसकी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच, 42 पूर्व जजों ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर बिना किसी सबूत के लगाए जा रहे आरोपों के खिलाफ चेतावनी दी है। पूर्व जजों ने “वोट चोरी” के आरोपों के बार-बार इस्तेमाल पर सवाल उठाए और शिकायतें दर्ज कराने के लिए स्थापित लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि इसे कानून के दायरे में रहकर ही किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया और वोटर डेटा को संभालने के तरीके को लेकर विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी समूहों की बढ़ती आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। SIR प्रक्रिया विवाद का एक बड़ा मुद्दा बन गई है; विरोधी पक्ष वोटर लिस्ट में सुधार के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं और कथित तौर पर वोटरों के नाम छूट जाने को लेकर चिंता जता रहे हैं। चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं की कानूनी वैधता की जांच की मांग करते हुए अदालतों में कई याचिकाएं भी दायर की गई हैं। पूर्व जजों का मानना है कि बिना सबूत के आरोप लगाकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। शनिवार को देश के जाने माने 124 पूर्व प्रशासकीय अधिकारियों ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए बयान जारी किया है।
राहुल गांधी पर संबित पात्रा का हमला
BJP नेता संबित पात्रा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी को ‘नालायक’ नेता कहा। पात्रा ने राहुल गांधी के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बैठक में INDIA ब्लॉक के ‘वोट चोरी’ के आरोप का खंडन नहीं किया। पात्रा ने कहा, ‘कल कुछ राजनेता राष्ट्रपति भवन गए थे। राष्ट्रपति भवन से बाहर आने के बाद राहुल गांधी का बयान एक ‘नालायक नेता’ जैसा था।’ उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इससे पहले कभी राष्ट्रपति को सड़क पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन में घसीटने की कोशिश नहीं की गई। पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को उस अराजकता की ओर खींचने की कोशिश की, जिसे वे भारत की सड़कों पर फैलाना चाहते हैं।
















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