हाईलाईट्स :
* गणपति राजेश सभागार में श्रीमद्भागवत कथा
* कथा सुरभि सदन गौशाला के निर्माण और संचालन हेतु आयोजित
* भक्तों की रक्षा करना भगवान का सहज स्वाभाव है
कोलकाता : संत-गुरु की कृपा से हम भ्रम से निकल कर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का अनुभव कर पाते हैं। हर व्यक्ति को जीवन में भगवान के भजन-कीर्तन का व्यसन होना चाहिए। भक्त प्रह्लाद बचपन से भगवान की लीलाओं का दर्शन-अनुभव करते थे। आम बच्चों की तरह प्रह्लाद असुरों के गुरु शुक्राचार्य के गुरुकुल में पढ़ने गए। प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु ने एक दिन पूछा, बेटा अब तक क्या पढ़ा। प्रह्लाद ने कहा कि यह शरीर भगवान की कृपा से मिला है इसलिए उनका भजन करना चाहिए। इसे सुनकर वह क्रोधित हो, प्रह्लाद को मारने दौड़ा। भगवान अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह भगवान बनकर प्रकट हुए। अपने भक्तों की रक्षा करना भगवान का सहज स्वाभाव है। ऐसे दयालु भगवान का जो भजन-कीर्तन नहीं करेगा उसका दुर्भाग्य है।
ये बातें राजस्थान गौ कल्याण ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए पूज्य आचार्य श्रीकांत शर्मा ‘बालव्यास’ ने गणपति राजेश सभागार में कहीं। प्रवचन के दौरान धूमधाम से नंदोत्सव मनाया गया. प्रवचन प्रांगण ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल लाल की’ के सम्वेत स्वर से गूंज उठा। आयोजन समिति के सदस्य राहुल दीवान ने जानकारी दी कि यह श्रीमद्भागवत कथा सुरभि सदन गौशाला के निर्माण, विकास और संचालन हेतु आयोजित की गई है। कथा को सफल बनाने में ट्रस्टीगण मुरारीलाल दीवान, बालकिसन बालासरिया, बनवारीलाल सोती, सत्यनारायण देवरालिया, बृजमोहन गाड़ोदिया, विश्वनाथ सेकसरिया, प्रेमचंद ढांढनिया, राजेश मित्तल, कृष्ण कुमार छापड़िया, राजेन्द्र प्रसाद बुबना, बालकिसन नेवटिया, अरुण केडिया सहित अन्य सदस्य सक्रिय रहे।इस अवसर पर पूर्व विधायक विवेक गुप्त, घनश्याम शोभासरिया, सतीश झुनझुनवाला, सुभाष बालासरिया, पवन माधोगढढ़िया, महावीर प्रसाद रावत, राम कथावाचक पुरुषोत्तम तिवारी, अविनाश गुप्ता, विष्णु फोगला, अरुण केजरीवाल, मोहन केडिया, महावीर सांवरिया सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संजय मस्करा ने किया।














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