सुरभि सदन गौशाला के निर्माण के लिए संकल्पित कथा
कोलकाता : सूरज रोज उगता हैं और कमल को खिलने के लिए ऊर्जा देता है और जगत को अंधकारमुक्त कर प्रकाशमय बनाता है.ठीक सूरज की तरह श्रीमद्भागवत कथा हमें ऊर्जा भरती हैं और हमें प्रभुमय बना देती है। कथा सूरज की तरह नित्य नवीन है। श्रीमद्भागवत पुराण पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण की कथा है। श्रीमद्भागवत कथा साक्षात् श्रीकृष्ण का स्वरूप है। जब हमारे कई जन्मों का पुण्य एकत्र होता है और श्रीकृष्ण कृपा करते हैं तब हमें श्रीमद्भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलता है। आत्मज्ञान होने पर जीव अमर हो जाता है। श्रीमद्भागवत ज्ञान कराने की कथा है। वृंदावन में जब भक्ति के बेटे ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो गए तो भक्ति नारदजी से अपनी पीड़ा बताई। भक्ति की पीड़ा को मुक्त करने के लिए नारद जी वेद, उपनिषद आदि कथा सुनाए पर ज्ञान और वैराग्य वैसे बूढ़े रहे।
जब नारद के आग्रह पर सनतकुमार ने श्रीमद्भागवत कथा सुनाए तब ज्ञान और वैराग्य जवान हो गए,भक्ति में वृद्धि हुई। भक्ति प्रसन्न होकर बोली ,मैं कहां रहूं? सनतकुमार ने कहा कि सबके हृदय में निवास करो।तब भगवान बिना बुलाए सबके हृदय में विराजमान हो गए। जीवन में प्रभु की कृपा चाहिए तो भगवान के नाम का जाप बढ़ाए। ईश्वर की इच्छा में अपनी इच्छा को जोड़ दीजिए तब जीवन में आनंद ही आनंद का अनुभव कीजिए। ईश्वर और संत किसी को दुख नहीं देते अपितु सब पर कृपा करते हैं।दीपक की तरह संत जलकर जगत में रोशनी फैलाता है। संत का फल है सत्संग।
आत्मदेव को जब संतान नहीं हुआ तो एक संत ने उन्हें फल दिया कि इसे अपनी पत्नी को खिला दो पर वह खाई नहीं गाय को खिला दी। गाय से गोकर्ण का का जन्म हुआ। गोकर्ण ने जब अपने भाई धुंधुकारी को श्रीमद्भागवत सुनाया तो वह प्रेत योनि से मुक्त हुआ। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से ज्ञान, भक्ति,वैराग्य और मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है। कुछ न कर सको तो प्रभु का भजन करो और जीवन को प्रभुमय बनाओ। ये बातें राजस्थान गौ कल्याण ट्रस्ट के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा पर प्रवचन करते परम पूज्य आचार्य श्रीकांत शर्मा ‘बालव्यास’ हुए गणपति राजेश सभागार में कहीं। राहुल दीवान ने जानकारी दी कि यह श्रीमद्भागवत कथा सुरभि सदन गौशाला के निर्माण, विकास और संचालन हेतु आयोजित की गई है। कथा को सफल बनाने में ट्रस्टीगण मुरारीलाल दीवान, बालकिसन बालासरिया, बनवारीलाल सोती, सत्यनारायण देवरालिया, बृजमोहन गाड़ोदिया, विश्वनाथ सेकसरिया, प्रेमचंद ढांढनिया, राजेश मित्तल, कृष्ण कुमार छापड़िया, राजेन्द्र प्रसाद बुबना, बालकिसन नेवटिया, अरुण केडिया सहित अन्य सदस्यगण सक्रिय रहे। कार्यक्रम संचालन संजय मस्करा ने किया।














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