कोलकाता : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को धनशोधन की जांच के तहत पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और अन्य लोगों के परिसरों पर छापे मारे। अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान कुल 15 परिसरों की तलाशी ली गयी। पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और गायक-नेता इंद्रनील सेन पर और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन पर UNESCO के नाम का गलत इस्तेमाल करके दुर्गा पूजा से पहले के टिकट गैर-कानूनी तरीके से बेचने का आरोप है। ED अधिकारियों की एक टीम सुबह-सुबह दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में सेन के घर पहुंची। पता चला है कि ED अधिकारियों की अलग-अलग टीमें शहर में 10 जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चला रही थीं, जिसमें कस्बा में पूर्व मंत्री का घर भी शामिल था। ED के कोलकाता जोनल ऑफिस ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत यह तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। यह कानून एजेंसी को तलाशी लेने और अपराध से जुड़ी कमाई से संबंधित होने के संदेह वाले दस्तावेजों या अन्य संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार देता है। पता चला है कि ED अधिकारियों की अलग-अलग टीमें शहर में 10 जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चला रही थीं, जिसमें कस्बा में पूर्व मंत्री का घर भी शामिल था। जिन अन्य जगहों पर केंद्रीय एजेंसी ने कार्रवाई की, उनमें हिंदुस्तान पार्क और हाइलैंड पार्क शामिल हैं। इनमें पूर्व मंत्री के रिश्तेदारों के घर भी शामिल हैं। हाइलैंड पार्क में जिस पते पर ED ने तलाशी शुरू की, वह इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े एक बिजनेसमैन का घर है।
इंद्रनील सेन की पत्नी मधुछंदा सेन चलाती हैं संस्था
आरोप है कि UNESCO के नाम का इस्तेमाल करके दुर्गा पूजा टूर के लिए ‘फर्जी पास’ बेचे गए। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती अनुमान है कि इसमें करीब 60 करोड़ रुपये का मामला शामिल है। इस साल जून में बोबाजार पुलिस स्टेशन में इंद्रनील, उनकी पत्नी मधुछंदा सेन और ‘मास आर्ट’ नाम की संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। मधुछंदा खुद भी इस संस्था से जुड़ी हुई हैं। विश्वसनीयता हासिल करने के लिए इन ‘फर्जी पास’ को ‘UNESCO’ के नाम से बेचा जा रहा था।
UNESCO से मान्यता मिलने के छह महीने के भीतर बनाई संस्था
यह शिकायत अंतरराष्ट्रीय संस्था की ओर से जॉयदीप मुखर्जी ने दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, ‘मास आर्ट’ नाम की संस्था 2021 में कोलकाता दुर्गा पूजा को UNESCO से मान्यता मिलने के छह महीने के भीतर बनाई गई थी। वे कोलकाता की दुर्गा पूजा को बढ़ावा देने में UNESCO के ‘आधिकारिक पार्टनर’ होने का दावा करते हैं। लेकिन इस दावे को झूठा बताया गया। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि पूजा टूर के टिकट बेचने के लिए बिना इजाजत UNESCO के नाम, लोगो आदि का इस्तेमाल किया गया।
प्रीव्यू शो पास के नाम पर रुपयों का गबन
यह भी पता चला है कि कोलकाता में लगभग 24 दुर्गा पूजा ‘प्रीव्यू शो’ के पास ऊंची कीमतों पर बेचे गए थे। कुछ मामलों में, इन पास की कीमत ₹1,749 से ₹5,499 के बीच थी। संबंधित संस्था ने दावा किया था कि UNESCO ने उन 24 पूजा पंडालों को चुना था। लेकिन इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, इस दावे में अब तक कोई सच्चाई नहीं मिली है। आरोप है कि ‘प्रीव्यू शो’ पास के नाम पर पैसे का गबन किया गया है। शुरुआती जांच से पता चला है कि 2022 में इन पास को पाने के लिए लगभग 19,000 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था; 2023 में 34,000 और 2024 में 61,000 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। हालांकि इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस ने शुरू की थी, लेकिन बाद में ED ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू कर दी।
दस्तावेजों की जांच
अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान, एजेंसी पैसे के लेन-देन और उसके इस्तेमाल का पता लगाने के लिए मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य चीजों की बारीकी से जांच कर रही है। यह कार्रवाई दुर्गा पूजा से पहले उसकी झलक दिखाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने वाली एक संस्था में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में की गई।
अधिकारियों के अनुसार, आरोप है कि इंद्रनील सेन की पत्नी के नेतृत्व वाली ‘मासआर्ट’ (महानिर्वाण रोड मास आर्ट सोसाइटी) ने लोगों से यह झूठा दावा करके बड़ी रकम एकत्र की कि यह धन यूनेस्को द्वारा प्रायोजित एक संस्था के लिए है। आरोप है कि बाद में इन पैसों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया। ईडी की कार्रवाई पर सेन या ‘मासआर्ट’ की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।














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