हवाई यात्रा करने वालों की सुरक्षा को लेकर न्यायाधीश ने चिंता जाहिर की

कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे के निकट की मस्जिद में नमाज की इजाजत का मामला


कोलकाता : कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति से जुड़ी याचिका पर गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। एयरपोर्ट अथॉरिटी और राज्य सरकार ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताईं। सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने फ्लाईदुबई कॉकपिट घटना का हवाला देते हुए कहा – ‘नहीं, सिर्फ भारत में नहीं। आजकल यह हर जगह हो रहा है। कल की फ्लाईदुबई घटना को देखिए। आप कल्पना भी नहीं कर सकते।’
कोर्ट की यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई, जिसमें इजइजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान को पायलटों के बीच टकराव के बाद सऊदी अरब की ओर मोड़ दिया गया था। आरोप है कि फ्लाइट के ओमानी मूल के को-पायलट ने कैप्टन स्मित माच्छर पर हमला किया था। कहा जा रहा है कि को-पायलट विमान को क्रैश करवाना चाह रहा था।
कोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं के बीच फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को तय कर दी।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने रनवे के पास होने पर जताई चिंता
एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि मस्जिद एयरपोर्ट के ऑपरेशनल एरिया में है और रनवे के काफी करीब स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर है। अधिकारियों ने पहले हुई सुरक्षा चूकों का भी हवाला दिया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में लोगों को एयरपोर्ट के एप्रन एरिया तक पहुंचते हुए पाया गया था। ऐसे में ऑपरेशनल एरिया में लोगों की आवाजाही को सुरक्षा के लिहाज से जोखिम माना जा रहा है।

सरकार ने कहा, ‘1993 के बाद बदले सुरक्षा हालात’

अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने सुरक्षा स्थिति में आए बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1993 से पहले इस तरह के ज्ञात सुरक्षा खतरों की स्थिति नहीं थी, लेकिन पिछले वर्षों में खतरे बढ़े हैं। त्रिवेदी ने 2025 के लाल किला हमले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले खास तौर पर भारत में हो रहे हैं और मौजूदा सुरक्षा माहौल को देखते हुए एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थानों पर जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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