अयोध्या : अयोध्या में दशम दीपोत्सव-2026 के अवसर पर राम की पैड़ी पर भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान राम की पैड़ी पर उत्सव का विशेष माहौल देखने को मिला। दीपों की जगमगाहट और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच अयोध्या नगरी श्रीराम के स्वागत में सजी नजर आई।

अयोध्या के 10वें दीपोत्सव पर ‘राम की पैड़ी’ घाट लाखों मिट्टी के दीपों से जगमगा उठा। सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों को 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपों से रोशन किया जा रहा है। सरयू घाट पर दीये जलने शुरू हो चुके हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम और जानकी की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिवाली समारोह और 10वें दीपोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को प्रदर्शित किया गया।
सीएम योगी ने किसे मंथरा और मारीच कहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव 2026 को संबोधित करते हुए कहा, “पहले दीपोत्सव को याद कीजिए। जिसे हमने 2017 में प्रारंभ किया था। उस समय लोगों के मन में ये आश्चर्य होता था कि क्या अयोध्या में दीपोत्सव होगा? वो कहते थे कि दीपोत्सव यहां की परंपरा का हिस्सा नहीं था। मैंने याद दिलाया कि अयोध्या ने ही दुनिया को दीपावली दी थी, दीपोत्सव भी अयोध्या ने दिया है और यहीं से इसे आगे बढ़ाना है… आज आप देख सकते हैं कि लोकतंत्र में आपके वोट की कीमत क्या होती है। किसी शहर, किसी प्रदेश और किसी देश की तस्वीर कैसे बदलती है, ये लोकतंत्र ने कर दिखाया है।
पिछले 12 वर्षों में बदलता हुआ भारत, जिसे लोगों ने अविश्वास, अराजकता, आतंकवाद, नक्सलवाद और भ्रष्टाचार का पर्याय बना दिया था। पिछले 12 वर्षों में 140 करोड़ देशवासियों ने देश की इस बदलती तस्वीर को देखा है। ये नया भारत विरासत को बिना भेद-भाव के एक-एक नागरिक तक शासन की योजना को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य कर रहा है। ये नया भारत जो आतंकवाद को भी नेस्तनाबूत करता है, नक्सलवाद को भी दफन करता है और आज अराजकता के खिलाफ भी अपनी लड़ाई को बखूबी बढ़ाने का काम कर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व में विरासत, विकास,लोक कल्याणकारी योजना के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को हर भारतवासी आगे बढ़ाना चाहता है लेकिन दूसरी ओर कोप भवन में बैठे हुए मंथरा और मारीच इस पूरी व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किसी प्रकार से अराजकता को पैदा करके भारत को अस्त-व्यस्त करने की साजिशें भी रच रहे हैं। ये दीपोत्सव रामभक्तों के लिए एक संदेश है कि चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो, उफनता सागर हो या फिर जंगल जैसी कठिन चुनौतियां, जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो, जनता-जनार्दन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में एक संकल्प छिपा हुआ हो, दुनिया की कोई ताकत धर्मेव जयते और सत्यमेव जयते के लक्ष्य को प्राप्त करने में देर नहीं लगा सकती।















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