कोलकाता : ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले घोषित करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे अधिक संख्या बंगाल में है। इसके बाद आंध्र प्रदेश और ओडिशा का नंबर आता है। अधिकांश आरोपी नेताओं की ओर से मामलों को झूठा बताया गया है और अगर यह सत्य पाया जाता है तो इससे साबित हो सकेगा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून का कितना दुरुपयोग हो रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध की अखिल भारतीय औसत दर प्रति एक लाख (100,000) आबादी पर 66.2 मामले है, और कुल 4,48,211 मामले दर्ज किए गए थे।
बंगाल में, 63 विधायकों (MLAs), चार लोकसभा सांसदों (MPs) और दो राज्यसभा सांसदों ने चुनाव आयोग को नामांकन दाखिल करते समय दिए गए अपने हलफनामों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े लंबित मामलों की जानकारी दी है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लंबित मामलों वाले सांसदों और विधायकों की संख्या क्रमशः 22 और 17 है।
पूरे भारत में अलग-अलग पार्टियों के दो लोकसभा सांसदों और 12 विधायकों के खिलाफ बलात्कार के मामले लंबित हैं। इनमें से एक सांसद और दो विधायक बंगाल से हैं।
विभिन्न पार्टियों में से, भाजपा के दो मौजूदा विधायकों और दो मौजूदा सांसदों, कांग्रेस के चार विधायकों, तथा TDP, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, BJD, नेशनल पीपुल्स पार्टी, भारत आदिवासी पार्टी और AISF के एक-एक विधायक ने अपने खिलाफ बलात्कार के मामले लंबित होने की घोषणा की है।
772 मौजूदा सांसदों और 4,109 विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण से पता चला है कि 168 विधायकों और 19 मौजूदा सांसदों ने अपने खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।
केंद्र, बंगाल और 16 अन्य राज्यों में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पास महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपी निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे अधिक संख्या है।
भाजपा के 95 विधायकों, 10 लोकसभा सांसदों और एक राज्यसभा सांसद पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोप हैं।
कांग्रेस के 19 विधायकों और एक लोकसभा सांसद पर भी ऐसे ही आरोप हैं, जबकि भाजपा की सहयोगी पार्टी TDP के 17 विधायकों और एक राज्यसभा सांसद पर भी इसी तरह के आरोप हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपी जनप्रतिनिधियों की इस सूची में ममता बनर्जी की ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के एक राज्यसभा सांसद, एक निर्दलीय लोकसभा सांसद और पांच निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। इन अपराधों में एसिड अटैक से लेकर बलात्कार, महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना, यौन उत्पीड़न, शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से महिला का अपहरण या उसे डराना-धमकाना, और पीछा करना (स्टॉकिंग) जैसे कई अपराध शामिल हैं।
फरवरी 2020 में, सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे चुनाव लड़ने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण सार्वजनिक करें।
ADR ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं।
रिपोर्ट के साथ संलग्न कई हलफनामों से पता चलता है कि इन मामलों में अभी तक आरोप तय (charges framed) नहीं हुए हैं। ADR ने राजनेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की एक तय समय-सीमा के भीतर जांच और सुनवाई पूरी करने की सिफारिश की है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध : सूची में बंगाल के जनप्रतिनिधि सबसे ऊपर














Leave a Reply