कोलकाता ने जूट की पत्तियों से बने इनोवेटिव ड्रिंक की तकनीक के लिए पेटेंट हासिल किया

कोलकाता : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोलकाता ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान को भारतीय पेटेंट संख्या 594436 मिला है, जो जूट की पत्तियों से ‘एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर’ ड्रिंक बनाने की एक नई तकनीक से जुड़ा है। यह ड्रिंक सीधे इस्तेमाल के लिए तैयार (रेडी-टू-यूज़) है।
‘अमाता मोरोहेइया इन्फ्यूजन’ (Amata Moroheiya Infusion) नाम की यह तकनीक, जूट की उन पत्तियों को, जिनका बहुत कम उपयोग होता था, एक बेहतरीन हर्बल पेय में बदल देती है। इसमें किसी भी तरह के प्रिजर्वेटिव (preservative) का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इससे पूरी फसल के उपयोग का एक नया रास्ता खुल गया है। इस तकनीक को ICAR से प्रमाणन (certification) मिला है, इसका ट्रेडमार्क रजिस्टर हो चुका है और इसे कमर्शियल लाइसेंस भी मिल गया है। यह दिखाता है कि कैसे वैज्ञानिक शोध को सफलतापूर्वक एक ऐसे उत्पाद में बदला गया है, जिसकी बाज़ार में मांग है।
ICAR-NINFET के निदेशक ने इस शानदार उपलब्धि के लिए पूरी रिसर्च टीम को बधाई दी। उन्होंने इनोवेशन, बौद्धिक संपदा (intellectual property) बनाने और तकनीक को कमर्शियल स्तर पर ले जाने के प्रति टीम की लगन की सराहना की।
यह तकनीक किसान उत्पादक कंपनियों (Farmer Producer Companies) के ज़रिए जूट की पत्तियों के लिए बाज़ार तैयार कर रही है, जहाँ इनकी कीमत लगभग ₹350–₹400 प्रति किलोग्राम तक मिल रही है। इससे किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन रहा है।
यह उपलब्धि ICAR-NINFET के उस संकल्प को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य “प्राकृतिक रेशे के कचरे को देश की संपत्ति में बदलना” है। यह वैज्ञानिक इनोवेशन को ग्रामीण स्तर पर एक टिकाऊ उद्यम में बदलता है और किसानों की समृद्धि को बढ़ाता है।
(स्रोत: ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल फाइबर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोलकाता)

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