मुख्य बिन्दु :
- परिसीमन के बाद कोलकाता और हावड़ा में पहला निगम चुनाव
- चुनाव आयोग द्वारा अगले कुछ दिनों में अधिसूचना की उम्मीद
- दूसरी पार्टी से आए लोगों को भाजपा का टिकट नहीं : शमिक भट्टाचार्य
- तृणमूल के अलग–अलग गुटों में शह–मात का खेल शुरू
कोलकाता : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने साफ कर दिया है कि वह नगर निगम और पालिका के चुनावों में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और सभी वार्डों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि दूसरी पार्टी से आए लोगों को भाजपा का टिकट नहीं दिया जाएगा।
BJP के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि बंगाल के लोगों ने TMC नेताओं के पाला बदलने के लिए BJP को नहीं चुना है। मतदाताओं ने BJP सरकार को इसलिए नहीं चुना था कि तृणमूल नेता पाला बदलकर (पार्टी बदलकर) BJP में शामिल हो जाएं। कोलकाता और हावड़ा में होने वाले आगामी निकाय चुनावों की रणनीति तय करने के लिए BJP की दो दिवसीय बैठक चल रही है, जिसका पहला दिन शुक्रवार को था। साल्ट लेक स्थित BJP कार्यालय में हुई इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल भी मौजूद हैं। बैठक में निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर चर्चा चल रही है। इसमें अब तक यह तय किया गया कि BJP, KMC (कोलकाता नगर निगम) की सभी 209 सीटों और HMC (हावड़ा नगर निगम) की सभी 68 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पत्रकारों ने पूछा कि क्या तृणमूल के पूर्व पार्षद BJP की उम्मीदवारों की सूची में शामिल होंगे, तो भट्टाचार्य ने कहा, “मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, और अगर मेरे पास जानकारी नहीं है, तो पार्टी के पास भी कोई जानकारी नहीं है। BJP को ऐसा कोई आवेदन नहीं मिला है।”
हालांकि, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “राजनीति में कोई तय नियम नहीं होते। यहाँ हमेशा अलग-अलग समीकरण बनते-बिगड़ते रहते हैं। अभी हम कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। उम्मीदवारों की सूची जारी होने पर आपको पता चल जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि BJP उम्मीदवारों का चयन उनकी जीत की संभावना, जनता के बीच उनकी छवि और उनके अनुभव के आधार पर करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी ने अभी तक किसी गठबंधन पर कोई चर्चा नहीं की है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि BJP अगले 15 दिनों के भीतर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है। भट्टाचार्य ने कहा, “हम उम्मीदवारों के चयन के मानदंड (क्राइटेरिया) का खुलासा नहीं करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि (अगला) मेयर दिखने में कैसा होगा, लेकिन आपको एक अच्छा मेयर मिलेगा जो काम करेगा।” इससे पहले, सुवेंदु अधिकारी ने मतदाताओं से निकाय चुनावों में BJP का समर्थन करने की अपील की थी, ताकि एक “ट्रिपल-इंजन सरकार” बन सके। इस महीने की शुरुआत में, वे इन दो शहरों के लिए संगठनात्मक तैयारियों, उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर चर्चा करने के लिए दिल्ली गए थे।
TMC के दोनों धड़ों में सियासी घमासान
राज्य विधानसभा चुनावों में हार के बाद बिखरी तृणमूल कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों- ममता बनर्जी की अगुवाई वाली MAITC, रितब्रता बनर्जी की DTC और नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए तृणमूल के बागी सांसदों- के बीच जुबानी जंग और प्रतिद्वंद्विता बेहद तेज हो गई है। चुनाव अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले तृणमूल के अलग-अलग गुटों में शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।
कालीघाट स्थित पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं ने कहा कि उम्मीदवार चयन में केवल निष्ठावान नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। कांग्रेस के साथ गठबंधन पर पार्टी ने कहा कि इस पर केंद्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा।
ममता खेमे के विधायक कुणाल घोष ने श्यामाबाजार इलाके की दीवार पर बने एक ग्राफिटी का फोटो शेयर किया, जिसमें NCPI में शामिल हो चुके उत्तर कोलकाता के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के चेहरे पर काली स्याही पोत दी गई थी। इस ग्राफिटी में उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की तस्वीरें थीं, जिन्हें छुआ तक नहीं गया था। कुणाल घोष ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के बाकी ‘गद्दारों’ के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए।
रीतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) के अध्यक्ष अरूप राय ने स्पष्ट किया कि वे “असली तृणमूल” हैं और NCPI के साथ बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगे। कोलकाता नगर निगम (KMC): वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई है। हावड़ा नगर निगम (HMC): वार्डों की संख्या 50 से बढ़ाकर 68 कर दी गई है। मई में विधानसभा चुनावों में हार के बाद कोलकाता के मेयर और तृणमूल पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था, जबकि हावड़ा में परिसीमन विवाद के कारण 2018 के बाद से चुनाव नहीं हुए थे। वर्तमान में दोनों निकायों की कमान राज्य सरकार की ओर से नियुक्त प्रशासकों के हाथों में है। चुनाव आयोग द्वारा अगले कुछ दिनों में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।














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