मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया से जज हुए परेशान

Highlights :

  • बंगाल के जजों ने चुनाव आयोग के पोर्टल में गिनाईं कमियां
  • लाखों मतदाताओं के रिकार्ड रखने की प्रक्रिया से असंतुष्ट
  • दस्तावेजों को ऑन लाइन सुरक्षित रखने में हो रही परेशानी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर विवाद जारी है। ये अब चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल के जजों का गठन किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल में कई तरह की कमियों की शिकायत की है। जजों ने EC के डिजिटल पोर्टल में नोटिस, ऑनलाइन सुनवाई, दस्तावेज और वोटर का नाम बहाल करने जैसी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अगस्त को ट्रिब्यूनल जजों की बैठक हुई थी, जहां पोर्टल से जुड़ी दिक्कतों का जिक्र किया गया। जजों के मुताबिक, सिस्टम में पार्टियों को नोटिस भेजने, एक्सट्रा डॉक्यूमेंट को सेफ रखने, ऑनलाइन सुनवाई करने और हटाए गए वोटर का नाम दोबारा जोड़ने जैसी फैसिलिटी सही से मौजूद नहीं थीं।

पार्टियों को नोटिस भेजने में परेशानी

जजों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नोटिस भेजने की व्यवस्था को लेकर थी। रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल पर ऐसा नॉर्मल सिस्टम नहीं था, जिससे ट्रिब्यूनल सीधे संबंधित लोगों को नोटिस भेज सकें। जजों ने बताया कि नोटिस का एक फॉर्मेट मई 2026 में मंजूर किया गया था, लेकिन उसे पोर्टल पर लागू नहीं किया जा सका। इसके कारण कई ट्रिब्यूनल को संबंधित जिला अधिकारियों के जरिए ईमेल से नोटिस भेजने की कोशिश करनी पड़ रही थी।

एक्सट्रा डॉक्यूमेंट रखने की भी दिक्कत

ट्रिब्यूनल जजों ने यह भी बताया कि अगर किसी वोटर से एक्सट्रा डॉक्यूमेंट मांगे जाते हैं या पहले अपलोड किए गए दस्तावेज पर्याप्त नहीं होते हैं तो उन्हें पोर्टल पर सेफ रखने की सही व्यवस्था नहीं थी। इसका असर अपील की सुनवाई पर पड़ सकता है, क्योंकि किसी वोटर के नाम को लेकर फैसला करते समय डॉक्यूमेंट और रिकॉर्ड जरुरी होते हैं।

ऑनलाइन सुनवाई और नाम बहाल करने की सुविधा पर सवाल

जजों के मुताबिक, पोर्टल में वर्चुअल सुनवाई की सुविधा भी नहीं थी। इसके अलावा अगर किसी अपील का फैसला हो जाने के बाद न्यायिक आदेश के कारण वोटर का नाम दोबारा जोड़ने की जरूरत पड़े तो पोर्टल पर उसे वापस जोड़ने की व्यवस्था भी नहीं थी। अपील करने वाले व्यक्ति को ट्रिब्यूनल के ऑर्डर की कॉपी हासिल करने या उसे पोर्टल से डाउनलोड करने की प्रोसेस को लेकर भी सवाल उठाए गए।

फिजिकल अपील के रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता

जजों ने जिला मजिस्ट्रेट या जिला चुनाव अधिकारियों के कार्यालय में फिजिकल रूप से जमा की गई अपीलों के रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर ऐसे रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया तो अपील करने वाले लोगों की याचिका पर कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपील दाखिल करने की व्यवस्था का जिक्र किया था। ऑफलाइन जमा की गई अपीलों को डिजिटल सिस्टम पर अपलोड करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई थी।

27 लाख से ज्यादा वोटर हुए थे प्रभावित

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान 27.16 लाख वोटरों के नाम हटाए गए थे। इनमें से करीब 22.21 लाख लोगों ने अपना नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए अपील की है। यानी हटाए गए वोटरों का बड़ा हिस्सा ट्रिब्यूनल पहुंचा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें 22.21 लाख अपीलें हटाए गए वोटरों की ओर से नाम वापस जोड़ने के लिए हैं, जबकि 16.10 लाख अपीलें ऐसे नामों के खिलाफ हैं, जिन्हें वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था।

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