पुलिस ने आरोपियों को “टॉपलेस” परेड कराया !

कोलकाता : एक 13 वर्षीया बच्ची को 18 वर्ष के एक लड़के के द्वारा चुम्बन लेने के मामले में पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर तृणमूल कांग्रेस के कुणाल घोष और सीपीएम के मो, सलीम ने आपत्ति व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने आरोपियों को “टॉपलेस” परेड कराया। विपक्षी नेताओं ने इसे “असभ्य हरकत”बताया है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि वह घटना की पुनरावृत्ति के माध्यम से इस मामले की तह में जाने का कार्य कर रहे थे और सुरक्षा कारणों से आरोपियों को शर्ट निकालने को कहा गया था।
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि कोलकाता पुलिस ने इन आरोपियों को बिना शर्ट के (ऊपरी शरीर नंगा करके) सबके सामने घुमाया। घोष ने कहा, “पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इन लोगों को बिना शर्ट के सार्वजनिक सड़क पर घुमाना एक असभ्य हरकत है। कानून में इसकी कोई अनुमति नहीं है।”
CPI(M) के राज्य सचिव मो. सलीम ने भी पुलिस की आलोचना की। उन्होंने कहा, “राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस हमेशा अपराध का पता लगाने के लिए जानी जाती थीं, न कि सामंती या पुरानी सोच वाली हरकतों के लिए।”

इन लोगों पर आरोप है कि रविवार रात दक्षिण-पूर्व कोलकाता के सरसुना इलाके में, इन्होंने एक 18 साल के युवक, उसके पिता और उसके दोस्त को बंदूक की नोक पर बंधक बनाया और उन्हें नग्न होकर चलने के लिए मजबूर किया। आरोप है कि 18 साल के युवक का उक्त लड़की के साथ अफेयर था। जबकि बच्ची के परिजनों का कहना है कि 13 साल की उनकी बच्ची को बर्गला कर उसके साथ जबरदस्ती की कोशिश की गई। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “13 साल की एक लड़की के माता-पिता और उसके मामा को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। उनके साथ एक और व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इन तीनों को उस जगह ले जाया गया ताकि उनके बयानों की पुष्टि की जा सके।”

अधिकारी ने आगे बताया, “आरोपियों को उसी जगह ले जाया गया, जहां उन्होंने पीड़ितों को कपड़े उतारने और नग्न होकर घर जाने के लिए मजबूर किया था। उनसे रविवार रात हुई घटना की पूरी जानकारी मांगी गई। उन्हें सबके सामने घुमाया नहीं गया, बल्कि सड़क पर चलाया गया ताकि वे बता सकें कि उन्होंने अपराध कैसे और कहाँ किया। ऐसा कई अन्य मामलों में भी किया जा चुका है।”
जब पूछा गया कि तीनों संदिग्धों के ऊपरी शरीर नंगे क्यों थे, तो अधिकारी ने इसे एक एहतियाती कदम बताया। उन्होंने कहा, “वह एक भीड़-भाड़ वाली जगह थी और वे पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर सकते थे। बिना शर्ट पहने किसी व्यक्ति को दूर से ही आसानी से पहचाना जा सकता है, इसलिए उनके लिए भागना बहुत मुश्किल होता।” शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लड़की का मामा इस मामले में मुख्य आरोपी है।
शिकायत के मुताबिक, रविवार शाम लक्ष्मी पूजा के दौरान वह युवक लड़की से मिलने बसुंधरा पार्क इलाके में गया था, जहां उसे और उसके दोस्त को पकड़कर बंद कर दिया गया। बाद में आरोपी ने फोन करके उस युवक के पिता को बुला लिया।

एक दूसरे पुलिस अधिकारी ने बताया, “18 साल का युवक और नाबालिग लड़की कई महीनों से एक-दूसरे को जानते थे। लड़की के परिवार को उनके रिश्ते पर ऐतराज था। रविवार को, लड़की के मामा—जो ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के लिए काम करते हैं—ने कथित तौर पर युवक, उसके पिता और उसके दोस्त पर पिस्तौल तान दी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि इन तीनों के साथ मारपीट भी की गई।”

युवक के पिता का आरोप है कि लड़की के मामा ने उनसे कहा कि वे पिस्तौल से अपने बेटे को गोली मार दें या चाकू घोंप दें। जब उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया, तो उन तीनों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें मुख्य सड़क पर नग्न अवस्था में चलाया गया। आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी देने, अपहरण करने और अवैध रूप से बंधक बनाने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं। मीडिया से बात करते हुए युवक के पिता ने कहा, “जब वे हमें घुमाना (परेड कराना) चाहते थे, तो उन्होंने हमें किसी तंग गली से नहीं ले जाने दिया। वे हमें भीड़-भाड़ वाली मुख्य सड़क पर ले गए। वहां लोगों ने वीडियो बना लिए, जो बाद में वायरल हो गए।”

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