मुख्य बातें :
- उत्तरी कोलकाता डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित
- राज्य में अक्टूबर में 5.5 हजार नए मामले सामने आए
- इस साल पूरे राज्य में बारह हजार से अधिक प्रभावित
कोलकाता: त्योहारी सीजन के आखिर में डेंगू के मामलों में अचानक आई तेजी ने कोलकाता को चौंका दिया है। अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। मानसून की शुरुआत में मामले औसत से कम थे, लेकिन सितंबर के आखिर से अक्टूबर तक इनमें काफी तेजी आई है। अब यह संख्या सीजन के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अक्टूबर के पहले 23 दिनों में ही 5,500 से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, 1 जनवरी से 5 अक्टूबर 2026 के बीच कोलकाता में 2,800 मामले दर्ज किए गए हैं, जो सीजन के आखिर में हुई एक बड़ी बढ़ोतरी को दर्शाता है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में ही शहर में डेंगू के 1,270 नए मामले दर्ज किए गए। अक्टूबर की शुरुआत तक, जनवरी से अब तक कोलकाता में कुल मामलों की संख्या लगभग 2,800 हो गई। सभी आंकड़ों को मिलकर देखें तो इस साल पूरे राज्य में डेंगू से प्रभवित लोगों की संख्या बारह हजार से अधिक हो चुकी है।
उत्तरी कोलकाता सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां कोसीपोर-बेलगाछिया इलाके में शहर के कुल मामलों का लगभग 25% हिस्सा दर्ज किया गया है। सितंबर में पश्चिम बंगाल में डेंगू के मामलों की संख्या 5,000 के पार पहुंच गई, जिसमें मुर्शिदाबाद, कोलकाता और उत्तर 24 परगना में आई तेजी का बड़ा हाथ रहा। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, त्योहारों के महीने अक्टूबर में ही पूरे राज्य में 5,500 से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए। सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद में सामने आए हैं, जबकि हावड़ा दूसरे और कोलकाता तीसरे स्थान पर है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गा पूजा वाले हफ्ते में कोलकाता में डेंगू के मामले, साल के बाकी हफ्तों के मुकाबले करीब 15% ज्यादा रहे।
अधिकारी ने कहा, “जनवरी से अब तक सामने आए कुल मामलों के हिसाब से कोलकाता राज्य में दूसरे नंबर पर है।” उन्होंने आगे कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान हावड़ा में मामलों का अचानक बढ़ना चिंता का विषय है। अधिकारी ने बताया, “स्वास्थ्य मंत्री ने हावड़ा, मुर्शिदाबाद और अन्य चिंताजनक जिलों की स्थिति पर चर्चा करने के लिए सोमवार को एक बैठक बुलाई है।”
चार्नॉक अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के प्रमुख निशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से अस्पताल की OPD में हर दिन औसतन 8-10 डेंगू मरीज आ रहे हैं। फिलहाल 10 डेंगू मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। अग्रवाल ने कहा, “कुछ मरीजों में गंभीर जटिलताएं देखी गईं, जैसे प्लेटलेट्स में भारी गिरावट और ब्लीडिंग (रक्तस्राव)। वहीं, कुछ मरीजों को लगातार बुखार था, जिसके कारण उन्हें भर्ती करना पड़ा। अब सभी की हालत स्थिर है। अभी तक सबसे आम लक्षण तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द और सिरदर्द रहे हैं। हमारे पास ऐसे मरीज भी आए हैं, जिनमें बुखार के साथ-साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पेट और आंतों से जुड़ी) समस्याएं, जैसे दस्त भी देखने को मिली हैं।”
मणिपाल अस्पताल, ढाकुरिया में पिछले दो हफ्तों से हर दिन लगभग दो मरीज आ रहे हैं। संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ सायन चक्रवर्ती ने बताया, “ज्यादातर मरीज बुखार, जोड़ों में दर्द, उल्टी और शरीर पर रैशेज (चकत्ते) जैसी आम समस्याओं के साथ आ रहे हैं।” बीपी पोद्दार अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट सत्यकी बसु ने बताया कि कुछ मरीजों में ऐसे लक्षण दिखे जो सामान्य डेंगू के लक्षणों से थोड़े अलग थे। बसु ने आगे कहा, “इनमें से कुछ लक्षण ऐसे हैं जो किसी अन्य वायरल बीमारी में भी हो सकते हैं, इसलिए किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले मरीज की क्लिनिकल जांच करना बहुत जरूरी है। ऐसे मामलों में, हमें केवल तेज बुखार, शरीर में दर्द और सिरदर्द जैसे सामान्य लक्षणों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मरीज की कुल स्थिति और बीमारी के कितने दिन हो गए हैं, इसे देखते हुए डेंगू की जांच करानी चाहिए।
शुरुआती दौर में प्लेटलेट काउंट नॉर्मल होने का मतलब यह नहीं है कि डेंगू नहीं है, क्योंकि बुखार शुरू होने के पांच दिन बाद अक्सर प्लेटलेट का स्तर कम होने लगता है।” पिछले डेढ़ हफ्ते में बीपी पोद्दार अस्पताल में डेंगू के लिए 80 सैंपल की जांच की गई। इसमें मरीज की स्थिति और बीमारी के चरण के आधार पर NS1 एंटीजन, IgG और IgM एंटीबॉडी टेस्ट शामिल थे। इनमें से केवल एक सैंपल में डेंगू की पुष्टि हुई। अक्टूबर के पहले 23 दिनों में ही डेंगू के 5,500 से ज्यादा नए मामले सामने आए, जिनमें से बड़ी संख्या कोलकाता से है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में ही शहर में डेंगू के 1,270 नए मामले दर्ज किए गए थे। अक्टूबर की शुरुआत तक, जनवरी से कोलकाता में कुल मामलों की संख्या लगभग 2,800 तक पहुँच गई।
स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी ने बताया कि डेंगू के मामलों के मामले में कोलकाता अब जिलों की सूची में दूसरे स्थान पर है; मुर्शिदाबाद इस सूची में सबसे ऊपर है, जिसके बाद हावड़ा और उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। उत्तरी कोलकाता पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जहाँ शहर के कुल दर्ज मामलों में से लगभग 25% मामले कोसीपोर-बेलगाछिया इलाके से सामने आए हैं। कोलकाता नगर निगम, हावड़ा और बिधाननगर के कुछ खास वार्डों को ‘एक्टिव हॉटस्पॉट’ के रूप में चिह्नित किया गया है। अग्रवाल ने बताया कि मामलों में इस देरी से हुई बढ़ोतरी का एक कारण अक्टूबर की शुरुआत में मौसम में आया अचानक बदलाव हो सकता है। अग्रवाल ने कहा, “तापमान में अचानक आई (भले ही मामूली) गिरावट और पूजा की शुरुआत में रुक-रुक कर हुई बारिश ने वायरस को फैलने में मदद की और मच्छरों के पनपने की जगहों को बढ़ा दिया।”












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