फिरहाद और मदन मित्रा का सन्यास !

कोलकाता : वाममोर्चा के शासनकाल में ममता बनर्जी के साथ लगभग हर मोर्चे पर डट कर लड़ाई लड़ने वाले मदन मित्रा और फिरहाद हकीम का राजनीति से मोह भंग होने की घोषणा से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में जोरदार बहस छिड़ गई है। सिर्फ ये दोनों नेता ही नहीं ममता बनर्जी से अलग होकर अलग राजनीतिक दल बनाने का पहल करने वाले अधिकांश सांसद और विधायक चाहते हैं कि अभिषेक बनर्जी को पार्टी के पदों से हटाकर ममता वास्तविक तौर पर पार्टी की कमान संभालें। और अगर ऐसा होता है तो फिर पार्टी की सारी गुटबाजी समाप्त हो जाएगी। लेकिन ममता बनर्जी इसके लिए राजी नहीं हैं और यही कारण है कि उनके साथ बने रहने को प्रयासरत उनके अपने ही सहयोगी अब राजनीति से सन्यास लेने की बात करने लगे हैं। चर्चा है कि राजनीति को बाय-बाय करने के लिए अभी और प्रदेश के कई कद्दावर नेता और जिलों के सैकड़ों नेता मन बना चुके हैं। संभव है उनकी ओर से सार्वजनिक घोषणा अगले कुछ दिनों या सप्ताह में हो।

क्या कहा फिरहाद ने ?
ममता गुट वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने घोषणा की है कि वे अब नगर निगम चुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही कहा कि वह विधायक बने रहना चाहते हैं, लेकिन इसके बाद अब कोई भी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अपने संबंधों और तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर कई बड़े खुलासे किए। ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते हुए भी फिरहाद हकीम ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हमने कभी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा। समस्या तब शुरू हुई जब उन्होंने अपने पुराने समर्थकों से ज्यादा अपने ‘खून’ यानी कि रिश्तेदारों और परिवार पर भरोसा करना शुरू कर दिया। हम सब उनके साथ खड़े थे, लेकिन उन्होंने हेलीकॉप्टर से एक नेता को लाकर बैठाना बेहतर समझा।”

शुभेंदु अधिकारी होते आज TMC के मुख्यमंत्री
राजनीतिक वफादारी पर बात करते हुए हकीम ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “अगर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सही महत्व दिया गया होता, तो शायद आज शुभेंदु अधिकारी TMC के मुख्यमंत्री होते।” पार्टी से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए हकीम ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “पिछले पांच सालों से पार्टी ने मेरा कोई इस्तेमाल नहीं किया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे दुर्गा पूजा के दौरान ममता बनर्जी को मिस कर रहे थे और जब भी उनसे मुलाकात होगी वे खुलकर अपनी बात रखेंगे।

क्या कहा मदन मित्रा ने ?
बंगाल की राजनीति में अपने अलग अंदाज के लिए चर्चित कामारहाटी के टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने भी राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं। विजयादशमी के मौके पर भावुक होते हुए कहा कि मौजूदा राजनीति में अनैतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और अब उन्हें इससे नफरत होने लगी है। कहा कि राजनीति का हिस्सा होने के कारण उन्हें खुद से भी नफरत होती है। हालांकि, उन्होंने राजनीति छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि इस बार विजयादशमी पर वह उन लोगों से नहीं मिल सके, जिन्होंने उन्हें चुनाव में जीत दिलाई। इसकी वजह हिंसा और सुरक्षा को लेकर चिंता बताई। उनके मुताबिक, उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश भी हुई थी, इस बारे में मुख्यमंत्री को जानकारी दी थी। दावा किया कि मुख्यमंत्री ने पुलिस को भी इस संबंध में निर्देश दिया था। कहा कि वह राजनीति से बेहद थक चुके हैं और अब इससे दूर होने पर विचार कर रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक माहौल की तुलना चावल में कंकड़ की अधिकता से करते हुए कहा कि जब अनैतिक लोगों की संख्या बहुत बढ़ जाती है तो उन्हें अलग करना मुश्किल हो जाता है।

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