सीएम का आदेश : गैर जमानती धाराओं में दर्ज होंगे केस
कोलकाता : चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत की घटना को लेकर कुछ लोगों ने अफवाह फैलाने की चेष्टा की जब केवल 17 लोगों की मृत्यु हुई थी तो कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर 22, 35 और कुछ ने डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मृत्यु होने का समाचार डाल दिया था। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फर्जी दावों को लेकर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने ऐसी पोस्ट लाइक और शेयर करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कोलकाता में हुई भगदड़ को लेकर बांग्लादेश से भी सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट साझा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पोस्ट को लाइक या शेयर करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में गैर-जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज किए जाएं।
कूचबिहार से एक व्यक्ति गिरफ्तार
मुख्यमंत्री के बयान से कुछ घंटे पहले ही पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने कूचबिहार जिले से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में मरने वालों की संख्या को लेकर गलत जानकारी फैलाई थी।
परिजनों तक राहत पहुंचाने का कार्य शुरू
मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की। 3 मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपए के चेक सौंपे। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार में ‘ग्रुप-डी’ की नौकरी देने का ऐलान किया था।
मुख्यमंत्री सबसे पहले पूर्व बर्धमान जिले के माधवदीघी में टोगोर भेज (37) और उनके 14 वर्षीय बेटे संदीप भेज के परिवार से मिले। इसके बाद वे हुगली जिले के आरामबाग पहुंचे। यहां उन्होंने टोगोर की रिश्तेदार और हादसे का शिकार हुई पियाली प्रमाणिक के परिजनों से मुलाकात की। उन्हें श्रद्धांजलि दी।
आरामबाग और पूर्व बर्धमान में पीड़ित परिवारों को ढाढस बंधाते हुए और पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्रतिबद्धता जतायी। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की आलोचना भी। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर इस मामले की जांच के लिए वर्तमान सेवारत न्यायाधीश (Serving High Court Judge) को नामित करने का अनुरोध किया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। चीफ जस्टिस रवींद्र वी घुगे ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में ही जांच कमेटी बनायी जाये।















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