“छठ पूजा से पहले पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कोलकाता के कई घाटों का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री उमेश राय, नगर आयुक्त स्मिता पांडे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद भी मौजूद रहे। टीम ने घाटों पर त्योहार की तैयारियों का जायजा लिया।”
कोलकाता : सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़े त्योहारों पर विभिन्न विचारधारा की सरकारें तरह-तरह के प्रतिबंध लगाती आईं हैं, लेकिन अब बंगाल में ऐसा नहीं होगा। यह बयान कुछ ही दिनों पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने दिया था। इस बयान का क्रियावयन होना छठ पूजा के संदर्भ में राज्य की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल के बुधवार को दिए गए एक बयान से साबित होता दिख रहा है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि बंगाल सरकार इस साल कोलकाता के रवींद्र सरोवर में छठ पूजा की अनुमति देने के लिए तैयार है, साथ ही प्रदूषण रोकने के लिए उचित सावधानी भी रखी जाएगी। उनके इस बयान पर फिर से कुछ पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है।
अगर सरकार की अनुमति मिल जाती है, तो छह साल बाद दक्षिण कोलकाता की इस झील में फिर से यह त्योहार मनाया जा सकेगा। कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 2020 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के एक आदेश के बाद यहां छठ पूजा पर रोक लगा दी गई थी, जिसे बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। यह प्रतिबंध झील के पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए लगाया गया था, जो कथित तौर पर पूजा-पाठ की सामग्री और लोगों की भारी भीड़ के कारण होता था।
रवींद्र सरोवर सुबह टहलने वालों, नौकायन करने वालों और प्रकृति प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है और इसे शहर का ‘ग्रीन लंग’ (पर्यावरण के लिहाज से फेफड़े जैसा महत्वपूर्ण हिस्सा) माना जाता है।
पॉल ने सवाल उठाया कि स्थानीय श्रद्धालुओं को झील में जाने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने पूछा कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग त्योहार मनाने के लिए आखिर कहां जाएंगे? उन्होंने पूछा, “रवींद्र सरोवर में अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती? स्थानीय लोग आखिर कहां जाएंगे?” उन्होंने यह भी कहा कि अनुमति तभी मिलेगी जब प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती जाएंगी।
2018 में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पूर्वी पीठ के समक्ष एक अवमानना याचिका दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि छठ पूजा के दौरान रवींद्र सरोवर में प्रदूषण फैलाकर ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन किया गया है। सुमिता बंद्योपाध्याय द्वारा दायर और 1,178 अन्य ‘मॉर्निंग वॉकर्स’ (सुबह टहलने वालों) के समर्थन वाली इस याचिका में कहा गया था कि उस साल 13 और 14 नवंबर को 73 एकड़ में फैली इस संवेदनशील झील के पास हजारों लोग जमा हुए थे। उन्होंने वहां फूल, फल, मिठाइयां और तैलीय चीजें अर्पित कीं, पटाखे फोड़े और तेज आवाज में संगीत बजाया। याचिका में तर्क दिया गया कि ये गतिविधियां NGT के 3 नवंबर, 2017 के आदेश का उल्लंघन थीं, जिसमें केवल उस साल के लिए ही झील में छठ पूजा की अनुमति दी गई थी। जब उनसे पूछा गया कि सरकार NGT के आदेश का पालन कैसे करेगी, तो पॉल ने कहा कि इसका कोई न कोई सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने छठ पूजा का विरोध किया
कुछ तथाकथित पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने ट्रिब्यूनल के 2017 के आदेश के उल्लंघन को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने झील में प्रदूषण फैलने और वहां आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए पैदा होने वाली परेशानी का हवाला दिया है, जो अब झील में पहुंचने लगे हैं। राज्यसभा के पूर्व सांसद जवाहर सरकार ने कहा कि रवींद्र सरोवर एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील जल निकाय है, जिसे बड़ी भीड़, शोर-शराबे और धार्मिक अनुष्ठानों से होने वाले प्रदूषण से बचाने की जरूरत है। जवाहर सरकार ने जोर देकर कहा कि रवींद्र सरोवर को ऐसी गतिविधियों से बचाया जाना चाहिए, जो इसके पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरणविदों और सुबह टहलने वालों (मॉर्निंग वॉकर्स) के समूह इस प्रस्तावित कदम का विरोध कर सकते हैं। ग्रीन टेक्नोलॉजिस्ट और पर्यावरणविद एस.एम. घोष ने कहा कि झील में छठ पूजा की अनुमति देना NGT के 2017 के आदेश की अवमानना हो सकती है।
बिहार और पूर्वाञ्चल का प्रमुख त्योहार ‘छठ पूजा’, जो सूर्य देव को समर्पित है, इस साल 15 और 16 नवंबर को मनाया जाएगा। यह त्योहार अब देश के सभी महानगरों में भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।














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