कोलकाता : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) 2002’ के तहत दिल्ली और कोलकाता में सात ठिकानों पर तलाशी ली है। यह कार्रवाई फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके, कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर के आयात के नाम पर विदेशों में अवैध रूप से फंड भेजने के मामले में की गई है।

यह जांच आयकर विभाग की शिकायत पर MVP पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इस मामले में वड्डी महेश और अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करने की साजिश रची और उन्हें असली बताकर विभिन्न बैंकों के जरिए विदेशों में पैसे भेजे।
ED के अनुसार, वड्डी महेश ने अपने पिता और अन्य लोगों के साथ मिलकर कोलकाता में कई कंपनियां बनाईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोले। इन खातों के जरिए सिंगापुर, हांगकांग और चीन की पांच कंपनियों को 569.03 करोड़ रुपये भेजे गए।
यह पैसा कथित तौर पर कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर खरीदने के नाम पर भेजा गया था। ED ने बताया कि बैंकों में विदेशी कंपनियों के नाम से फर्जी इनवॉइस जमा किए गए थे, जबकि इन पैसों के बदले कोई सॉफ्टवेयर आयात नहीं किया गया। जांच में यह भी पता चला कि भीमेंद्र कुमार गोयल – जिसे ED ने एक आदतन अपराधी बताया है और जो पहले भी COFEPOSA के तहत तीन बार हिरासत में लिया जा चुका है – कथित तौर पर कस्टम ड्यूटी से बचकर भारत में कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कपड़ों की तस्करी कर रहा था। उस पर नेपाल के लिए उपलब्ध ‘कस्टम ट्रांजिट डिक्लेरेशन स्कीम’ का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, गोयल ने अपने साथियों के जरिए वड्डी महेश से संपर्क किया, ताकि विदेशी सप्लायरों को भुगतान किया जा सके और तस्करी के सामान को बेचकर कमाए गए पैसों को ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के जरिए ठिकाने लगाया जा सके।
ED ने बताया कि जांच से पता चला है कि 2014 से 2017 के बीच, महेश को अपनी ‘शेल कंपनियों’ (कागजी कंपनियों) के बैंक खातों में अलग-अलग जगहों से फंड मिला। उसने गोयल के निर्देश पर यह पैसा विदेशों में भेज दिया। यह फंड कथित तौर पर सिंगापुर और हांगकांग की उन कंपनियों में रखा गया था जो या तो निष्क्रिय थीं या नई बनी थीं, और जिन्हें ‘नॉमिनी डायरेक्टर’ (नाममात्र के निदेशक) चला रहे थे। एजेंसी के अनुसार, बाद में यह पैसा गोयल के बैंक खातों और उसके परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों – M/s स्विस फॉक्स प्राइवेट लिमिटेड (Swiss Fox Pte Ltd) और M/s भाव टेक्नोलॉजी चाइना लिमिटेड (Bhav Technology China Limited) – में ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह, अपराध से कमाई गई रकम को वैध धन के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी पता चला कि गोयल ने पवन कुमार राल्ली के साथ मिलकर, नई दिल्ली में फर्जी नामों और गलत पतों पर कुछ फर्जी कंपनियां – M/s महक ओवरसीज, M/s करण ओवरसीज और M/s गीत एंटरप्राइजेज – चलाईं। ED का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा M/s विलेज हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट के जरिए विदेश भेजा गया और सिंगापुर की कंपनी M/s ईगल माउंट ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड को मिला, जिसका असली मालिक आशीष टोडी था। एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अपराध से कमाई गई रकम का शुरुआती अनुमान लगभग 1,500 करोड़ रुपये है। तलाशी के दौरान बिना हिसाब-किताब वाली नकदी, विदेशी मुद्रा (जिसमें 5,900 अमेरिकी डॉलर, 2,200 UAE दिरहम और 5,600 चीनी युआन शामिल हैं) के साथ-साथ कई दस्तावेज, रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी के कागज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। ED ने बताया कि जब्त की गई चीजों में अपराध से कमाई गई रकम को कई परतों (लेयरिंग) में छिपाने और फर्जी कंपनियों के जरिए उसे भारत से बाहर भेजने के सबूत मिले हैं। मामले की आगे की जांच चल रही है।













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