केंद्र सरकार के खिलाफ आयोजित रैली में दिखी विपक्ष की एकजुटता

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर रविवार को आईएनडीआईए गठबंधन द्वारा ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का आयोजन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के मुद्दे पर आयोजित इस विशाल रैली में गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार पर हमला बोला।
रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी एकजुटता की तस्वीर मंच से कहीं आगे तक दिखाई दी। मंच पर गठबंधन के घटक दलों के नेता एक साथ मौजूद थे तो मैदान के भीतर और वहां तक पहुंचने वाली सड़कों पर विभिन्न दलों के कार्यकर्ता और समर्थक अपने-अपने झंडों के साथ डटे थे। कांग्रेस से लेकर गठबंधन के अन्य दलों के झंडों से पटा मैदान और आसपास की सड़कों पर समर्थकों की मौजूदगी ने रैली को शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया। नेताओं के भाषणों के दौरान लगातार गूंजते नारो और तालियों से मंच पर मौजूद नेताओं को मैदान में बैठे समर्थकों का पूरा साथ मिला।



सुबह नौ बजे से पहुंचने लगे समर्थक
रैली में शामिल होने के लिए समर्थकों का पहुंचना सुबह करीब नौ बजे से ही शुरू हो गया था। इसके बाद रामलीला मैदान की ओर आने वाले लोगों का सिलसिला लगातार बढ़ता रहा। दोपहर तीन बजे रैली शुरू होने तक समर्थक पहुंचते रहे। मैदान में अलग-अलग दलों के झंडे लहराते कार्यकर्ताओं के समूह दिखाई दे रहे थे। वहीं, मैदान की ओर आने वाली सड़कों पर भी गठबंधन के दलों के समर्थकों की आवाजाही बनी रही। इस तरह रैली का माहौल केवल आयोजन स्थल तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के इलाके में भी राजनीतिक सरगर्मी दिखाई दे रही थी।

गीतों से भरा जोश, नारों से गूंजा मैदान
रैली में नेताओं के भाषण शुरू होने से पहले ही समर्थकों का उत्साह बनाए रखने के लिए लाउडस्पीकर से बीच-बीच में देशभक्ति के गीत सुनाए जाते रहे। गीतों की धुन के बीच समर्थक अपनी-अपनी पार्टी के झंडे लहराते और नारे लगाते नजर आए। मंच से संबोधन शुरू होने तक मैदान में राजनीतिक उत्साह का माहौल बन चुका था। अलग-अलग दलों के झंडों की मौजूदगी गठबंधन की साझा राजनीतिक ताकत के साथ-साथ उसके घटक दलों की भागीदारी भी दिखा रही थी।

भाषण के हर पड़ाव पर समर्थकों का साथ
करीब 80 मिनट तक चले नेताओं के संबोधनों के दौरान मैदान में उत्साह कम नहीं हुआ। नेताओं के भाषण के बीच-बीच में तालियां बजती रहीं और समर्थक नारे लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। कई बार नारों की गूंज ने भाषणों के बीच रैली के माहौल को और गरमा दिया। समर्थकों की लगातार प्रतिक्रिया से नेताओं को भी अपने संबोधन के दौरान जोश बनाए रखने के लिए अलग से प्रयास नहीं करना पड़ा। इस तरह रामलीला मैदान में जुटे कार्यकर्ताओं की मौजूदगी, अलग-अलग दलों के झंडों और नारों ने राजनीतिक संदेश को प्रभावी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *