मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी हारी

वाशिंगटन : अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजों से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे अमेरिकी संसद में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अपनी पार्टी के लिए जोरदार प्रचार करने के बावजूद ट्रंप हार नहीं रोक पाए। हार के बाद ट्रंप ने नतीजों को स्वीकार करने और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करने की बात कही है।

चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि ट्रंप की नीतियों और उनके कामकाज को लेकर मतदाताओं में नाराजगी रही है। चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने कई राज्यों में जाकर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था। उन्होंने जीत के लिए पूरी ताकत लगाई, लेकिन इसके बावजूद रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव को राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में इन नतीजों को ट्रंप के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। संसद में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से अब वे ट्रंप सरकार के फैसलों पर सवाल उठा सकेंगे और उनकी नीतियों का विरोध भी कर सकेंगे। हालांकि ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे, लेकिन संसद में बहुमत नहीं होने के कारण उनके लिए अपने फैसलों को लागू करना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस के दोनों सदनों में विपक्ष का नियंत्रण के बाद ट्रंप के लिए बड़े कानून पास कराना, बजट मंजूर कराना और अपने प्रमुख एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। उनकी सरकार को ज्यादा जांच-पड़ताल, संसदीय सुनवाई और फंडिंग संबंधी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिले झटके के बाद अब ट्रंप सरकार की ताकत पहले की तरह नहीं रह जाएगी। दोनों सदनों में बहुमत से चूकने के बाद ऐसा नहीं है कि ट्रंप अचानक शक्तिहीन हो जाएंगे, लेकिन उनकी सरकार के लिए आगे का रास्ता निश्चित रूप से मुश्किल हो सकता है। अमेरिकी राजनीति में ऐसी स्थिति को ‘डिवाइडेड गवर्नमेंट’ कहा जाता है, जब कांग्रेस अलग-अलग पार्टियों के नियंत्रण में हों।

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी एक रिसर्च के मुताबिक, ‘डिवाइडेड गवर्नमेंट’ की स्थिति में जरूरी कानून पास होने की संभावना लगभग 30% कम हो जाती है। राष्ट्रपति की बड़ी कोशिशों के फेल होने की दर 45% बढ़ जाती है, 75% तक बड़े नेशनल मुद्दे अटके रहते हैं और व्हाइट हाउस में कांग्रेस की जांच दोगुनी या तिगुनी हो जाती है। यही वजह है कि मिडटर्म चुनावों के नतीजे किसी भी राष्ट्रपति की राजनीतिक ताकत को प्रभावित करते हैं, भले ही उनका पद सुरक्षित रहे।
दरअसल, कांग्रेस अमेरिकी शासन व्यवस्था में कानून बनाने और सरकारी खर्चों को मंजूरी देने वाली संस्था है। यदि विपक्षी दल कांग्रेस पर नियंत्रण हासिल कर लेता है तो ट्रंप के कई बड़े एजेंडे, चाहे वे टैक्स, व्यापार, आव्रजन या घरेलू नीतियों से जुड़े हों, उन्हें संसद में विरोध का सामना करना पड़ सकता है। विपक्ष कई प्रस्तावों को रोक सकता है, उनमें बदलाव की मांग कर सकता है या उन्हें लंबे समय तक लटका सकता है।

ओबामा बोले- अमेरिकी जनता बांटने वाली नहीं, एकजुट करने वाली राजनीति चाहती है
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, “आज रात अमेरिकी जनता ने एक स्पष्ट संदेश दिया है। वे ऐसी राजनीति चाहते हैं जो लोगों को बांटने के बजाय उन्हें एकजुट करे और ऐसे नेता चाहते हैं जो उनकी चुनौतियों का ठोस समाधान पेश करें। ये नतीजे तभी संभव हो पाए क्योंकि देश के हर क्षेत्र में बेहतरीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे, जिनमें वे इलाके भी शामिल हैं जिन्हें पहले जीत की दौड़ से बाहर माना जाता था। ये उम्मीदवार अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए थे और उनकी राजनीतिक सोच भी अलग-अलग थी। लेकिन वे साझा मूल्यों, जनसेवा में विश्वास और अपने निर्वाचन क्षेत्रों तथा राज्यों के लोगों को सर्वोपरि रखने की प्रतिबद्धता के साथ एकजुट थे। हम उन हजारों चुनाव अधिकारियों और स्वयंसेवकों के भी आभारी हैं, जो दोनों राजनीतिक दलों से जुड़े थे। उन्होंने चुनाव को सुचारु रूप से संपन्न कराने और हमारे लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इस प्रशासन के पास अभी दो साल और हैं, लेकिन अब हमारा काम है कि हम पूरी ताकत से जुट जाएं, जहां भी हमारे पास बदलाव करने की शक्ति है, वहां बदलाव करें, आगे होने वाले नुकसान को रोकें और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करें।”

अमेरिकियों ने युद्ध को नकारा : ईरान के संसद अध्यक्ष

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि चुनावी जनादेश से साफ जाहिर होता है कि अमेरिकी जनता युद्ध नहीं चाहती। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए गालिबाफ ने कहा, “चाहे अंतरात्मा की आवाज़ हो या जीवन-यापन का सवाल, अमेरिकियों ने ‘युद्ध को ना’ कहा है, और हम इस संदेश का समर्थन करते हैं। अगर अमेरिकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आकाओं और ब्लैकमेलरों की सेवा करने के लिए अपनी जनता की इच्छा को धोखा देती है, तो उसे पता चल जाएगा कि हमारे ‘ना’ के साथ एक भयानक दुःस्वप्न भी जुड़ा है।

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