तेरापंथ कन्या मंडल का कन्या प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

“कन्या समाज की रत्न है” – मुनि जिनेश कुमार

कोलकाता / हावड़ा : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में कन्या प्रशिक्षण शिविर का आयोजन तेरापंथ कन्या मंडल उत्तर हावड़ा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में किया गया। जिसमें उत्तर हावड़ा, साउथ हावड़ा, साउथ कलकत्ता, पूर्वांचल, साल्टलेक, मध्य कोलकाता, लिलुआ की तेरापंथ कन्या मंडलों की कन्याओं ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा – भारतीय समाज में पवित्रता का प्रतीक है – कन्या। कन्या मानव समाज के भविष्य का आधार है। कन्या समाज की तस्वीर व तकदीर है। कन्या शक्ति है, संस्कृति है, त्याग की प्रतिमूर्ति है। कन्याओं को संस्कारी बनाने का अर्थ घर, परिवार व समाज को संस्कारी बनाना है। वह दो घरों को रोशन करने वाली रोशनी है। घर के मंदिर का दीपक है – बेटियां। बेटियां मानव मन का अंतर मन है। बेटियां पिता की झोली में कुदरत का वरदान है। बदलते परिवेश में कन्याओं को सुसंस्कारी बनाना बहुत आवश्यक है। कन्याएं शिक्षा के साथ माता-पिता के सम्मान को बनाये रखें। कन्याएं नशामुक्त रहें व गलत संगति से बचें। कन्याओं में जैनत्व के संस्कार पुष्ट रहे। वह देव, गुरु, धर्म के प्रति आस्थाशील रहे।

उन्होंने आगे रिफ्लेक्ट, इंस्पायर, स्ट्रॉन्ग, इवॉल्व – चार अंग्रेजी शब्दों पर प्रकाश डालते हुए कहा – कन्याएं आत्मचिंतन करें, जागरूक बनें। प्रेरणा बनें, सशक्त बनें व विकसित बनें। मुनि ने कहा जिस प्रकार एक छोटा सा दीपक अंधकार का नाश कर देता है उसी प्रकार छोटी सी प्रेरणा जीवन की दिशा व दशा को बदल सकती है। त्याग का दीप जलता रहे और सदाचार का विकास होता रहे। इस अवसर पर मुनि परमानंद ने कहा – जीवन में सफलता के लिए जिज्ञासा, लगन, सकारात्मक व यथार्थ सोच, सही पुरुषार्थ व कौशल का विकास मील का पत्थर साबित होते हैं। जीवन में गति सुधारने से पहले मति सुधार लें।

मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर हावड़ा तेरापंथ कन्या मंडल के संगान से हुआ। शिविर के विभिन्न सत्रों में अनेक कार्यक्रमों का समायोजन हुआ।

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