आज कोलकाता के राजारहाट स्थित Novotel में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित होकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान आर्थिक और औद्योगिक स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में उद्योग अन्य राज्यों में जा रहे हैं और उनमें से एक बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र में निवेश कर रहा है। हाल के समय में कई बड़े उद्योग समूहों के साथ समझौते हुए हैं, जिनकी लंबे समय से बंगाल में उपस्थिति थी, लेकिन अब वे अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि लगभग 1400 उद्योग पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र चले गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बड़े-बड़े लिस्टेड कंपनियों का किसी राज्य को छोड़कर जाना इस बात का संकेत है कि वहां निवेश का माहौल ठीक नहीं है। केवल रजिस्ट्रेशन के आधार पर उद्योग का आकलन नहीं किया जा सकता, बल्कि वास्तव में कितने उत्पादन शुरू हुए हैं, वही असली सूचक है।
युवा समाज के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और इस विशाल युवा शक्ति के लिए रोजगार सृजन हेतु औद्योगिकीकरण अत्यंत आवश्यक है। सरकार अकेले नौकरी नहीं दे सकती, बल्कि एक सहायक वातावरण तैयार कर सकती है— जहां प्राइवेट सेक्टर रोजगार उत्पन्न करेगा।
आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल वर्तमान में कर्ज के जाल में फंस गया है। राज्य के GSDP के मुकाबले कर्ज की मात्रा लगभग 39 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 25 प्रतिशत से अधिक को खतरनाक माना जाता है। इसके मुकाबले महाराष्ट्र में यह दर लगभग 18 प्रतिशत है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य द्वारा लिया गया कर्ज मुख्य रूप से विकास के लिए नहीं, बल्कि पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इससे दीर्घकाल में आर्थिक संतुलन और बिगड़ रहा है। साथ ही कैपिटल एक्सपेंडिचर में भी पश्चिम बंगाल पीछे है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि विभिन्न घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। सीएजी रिपोर्ट में भारी मात्रा में धन का हिसाब न मिलने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
इस संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं— जनधन, उज्ज्वला, किसान सम्मान निधि, ‘लखपति दीदी’ आदि— का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों के माध्यम से आम लोगों का विकास हुआ है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अपार संभावनाएं हैं और यदि केवल सुशासन और उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए, तो अगले 5-7 वर्षों में राज्य फिर से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।
पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने SIR के संदर्भ में कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है और इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है, जहां आपत्ति दर्ज कराने का भी अवसर है।
इसके अलावा उद्योग, भ्रष्टाचार, घुसपैठ, अर्थव्यवस्था और चुनावी स्थिति से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर उन्होंने दिए। उन्होंने दावा किया कि भय और आतंक की राजनीति अब काम नहीं करेगी और आम जनता बदलाव के पक्ष में निर्णय लेने के लिए तैयार है।
अंत में उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता से अपील की कि राज्य के विकास, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के हित में परिवर्तन के पक्ष में मतदान करें और एक स्थिर एवं विकासोन्मुख सरकार का गठन करें।












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