मुख्य बातें :
- मुख्य मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुराने हिंसक कांड को याद किया
- टांग तोड़ने की धमकी देने वाले तपन घोष के बारे में पुलिस से पूछा
- वेस्ट मेदिनीपुर SP से बोले मैं अपराधी को जेल में देखना चाहता हूं
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस पापिया सुल्ताना को विशेष टास्क सौंपा है। गत 31 अक्टूबर को गड़बेता पहुंचे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने छोटा अंगरिया केस के दो आरोपितों का जिक्र करके कहा कि ‘SP मैडम, आपको उसे ढूंढ़ निकालना होगा। मैं उन्हें जेल में देखना चाहता हूं। सरकार ने नंदीग्राम हिंसा के तमाम मामलों को खोलने के निर्देश दिए हैं। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पापिया सुल्ताना को निर्देश दिया है कि वह सीपीआई (एम) के नेता तपन घोष और शकुर अली से जुड़े पुराने मामलों की नए सिरे से जांच करें और उन्हें खोजकर निकालें।
मंच से सीएम ने दिया ऑर्डर
शुभेंदु अधिकारी ने मंच से कहा कि वे तपन घोष को जेल में देखना चाहते हैं। पुलिस को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी होगी। पश्चिम मेदिनीपुर के गढ़बेटा में एक जनसभा के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने यह चेतावनी दी। वे यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना को मंच से ही काम सौंप दिया। सीएम ने कहा कि उन्होंने एसपी को निर्देश दिया कि वे तपन घोष और शकुर अली को ढूंढ़ निकालें।
सीएम शुभेंदु अधिकारी क्या बोले
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि छोटा अंगारिया से लेकर 2007 में नंदीग्राम की घटनाओं तक जो लोग गड़बेता में सीएपीआई(एम) दफ्तर से काम करते थे, जिन्होंने हथियार उठाए और नंदीग्राम में ‘खूनी साजिश’ रची, उन सभी के मामले मैं फिर से खुलवाऊंगा। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि तपन और शकुर ने कभी धमकी दी थी कि अगर शुभेंदु अधिकारी कभी यहां आया, तो वे उसके पैर तोड़ देंगे। तीन दिन के भीतर ही मैं चंद्रकोणा रोड पहुंच गया और सुशांत घोष के गढ़ में खड़े होकर एक जनसभा की। इसके बाद उन्होंने एसपी पपिया सुल्ताना को निर्देश दिया।
सीएम ने पूछा तपन अभी कहां है?
सीएम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो गई थी। उसका कोई नामो-निशान नहीं बचा था। अब ‘कंकाल कांड’ के मुख्य आरोपी इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। तपन अभी कहां है? क्या वह अभी भी यहीं है, या भाग गया है? एसपी मैडम, आपको उसे ढूंढ़ निकालना होगा। मैं उसे जेल में देखना चाहता हूं।
क्या है छोटा अंगरिया नरसंहार
गड़बेता, छोटा अंगरिया, तपन और शकुर के नाम जब सामने आते हैं तो ये सीपीआईएम के लिए बेचैनी पैदा कर देते हैं। साल 2001 में जब वामपंथियों का दबदबा अपने चरम पर था। तब गड़बेता पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव छोटा अंगरिया में तृणमूल कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ताओं को अपना घर छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा था। स्थानीय सीपीआईएम नेतृत्व से आश्वासन मिलने के बाद इनमें से कुछ विस्थापित कार्यकर्ता वापस अपने इलाके में लौट आए। तब यह आरोप सामने आया था कि सीपीआईएम समर्थित हथियारबंद कैडर के एक गिरोह ने उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को जिंदा जला दिया था। इस मामले में तपन घोष और सीपीआईएम की जोनल कमिटी के सचिव शकुर अली आरोपित हैं। शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को फिर से उठाया है।















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