एक नवंबर को दिल्ली में जुटेगा विपक्ष, ममता बनर्जी ने भी हुंकार भरी

मुख्य बातें :

  1. एक नवंबर को दिल्ली में ‘वोट बचाओ महारैली‘
  2. इंडिया‘ (INDIA) गठबंधन के सहयोगी दल होंगे शामिल
  3. ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता की अपील की

कोलकाता। चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी इंडिया’ (INDIA) गठबंधन एक बार फिर केंद्र सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में है। कांग्रेस ने कहा है कि एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े पैमाने पर ‘वोट बचाओ महारैली’ आयोजित की जाएगी।


बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस रैली में विपक्षी दलों से एकजुट होकर शामिल होने की अपील की है। वहाँ वक्ताओं की सूची में नाम होने के बावजूद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ममता दिल्ली जाएंगी या नहीं। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर छात्रों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और नागरिक समाज के लोगों से आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया।

एक नवंबर को दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली प्रस्तावित है। तृणमूल अध्यक्ष ने इस जनसभा को लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक कदम बताया।

ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक तीखी सार्वजनिक अपील जारी की। उन्होंने ने ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, “रविवार, 1 नवंबर को ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A) गठबंधन रामलीला मैदान में एकजुट होगा।”उन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ विपक्ष के टकराव को पुरजोर समर्थन दिया है। उन्होंने नागरिकों, छात्रों, मजदूरों और नागरिक समाज के समूहों से रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़े संयुक्त प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान किया है।

उन्होंने लिखा, “वोट चोरी के खिलाफ यह लड़ाई हर भारतीय के चुनने के अधिकार की रक्षा करने की लड़ाई है। बंगाल और अन्य राज्यों में हुए ‘वोट लूट’ के मामले में जवाब चाहिए, खामोशी नहीं!”

उन्होंने विपक्ष की मुख्य चिंताओं को गिनाया: “EVM पर सवाल, वोटर डेटा पर संदेह, मतदाता सूची पर शक और वोटों की गिनती पर सवाल।”

ममता ने लोगों से अपील की कि वे अब चुप न रहें। उन्होंने लिखा, “मैं छात्रों, युवाओं, महिलाओं, मजदूरों और नागरिक समाज से अपील करती हूं कि वे इस लड़ाई में हमारे साथ जुड़ें।” उन्होंने कहा, “जब वोट खतरे में हो, तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “आइए, हम सब मिलकर अपने लोकतंत्र की रक्षा करें और अपने संविधान को बचाएं।”

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