कृषि संकट, कानून-व्यवस्था की स्थिति और मतदाता सूची शुद्धिकरण पर प्रेस वार्ता

राज्य अध्यक्ष श्री शमिक भट्टाचार्य ने भाजपा सॉल्ट लेक कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने राज्य में किसानों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। विभिन्न जिलों में आलू किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कर्ज का बोझ, प्राकृतिक आपदाएं और बाजार व्यवस्था में अनियमितताओं के कारण किसान अत्यधिक संकट में हैं। उनकी उपज के लिए उचित मूल्य का अभाव और बाजार में कृत्रिम नियंत्रण किसानों को आर्थिक रूप से बर्बादी की ओर धकेल रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी होने में विफल रही है और न्यूनतम समर्थन देने के बजाय जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कृषि नीतियों में असंगतियों और उचित योजना के अभाव के कारण उत्पन्न हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तर बंगाल और अन्य क्षेत्रों में अवैध बालू खनन तथा पर्यावरणीय क्षरण कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता कम हो रही है।

कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा और आंतरिक संघर्ष बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि हाल की घटनाओं में सत्तारूढ़ दल के भीतर आपसी संघर्ष के कारण जान तक गई है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और यह हिंसा लगातार बढ़ रही है। इस संदर्भ में उन्होंने चुनाव आयोग से सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

उन्होंने राम नवमी जुलूसों में बाधा डालने के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप सामाजिक विभाजन को बढ़ा रहा है।

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर उन्होंने त्रुटिरहित और पारदर्शी निर्वाचन सूची की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 जमा करने में बाधाएं उत्पन्न की गईं और कई प्रस्तुत फॉर्मों का सही तरीके से निपटान नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सभी शिकायतों पर सुनवाई पूरी करनी चाहिए और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिनके नाम सूची से हट गए हैं, वे फॉर्म-6 के माध्यम से पुनः आवेदन कर सकते हैं।

प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग वर्तमान स्थिति से भली-भांति अवगत हैं और इसका प्रभाव आगामी चुनावों में दिखाई देगा।

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