कोलकाता/हावड़ा । पूर्वांचल कल्याण आश्रम के 43वें वार्षिकोत्सव 2026 का आयोजन कलामंदिर प्रेक्षागृह में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ । प्रातः 10:30 बजे ॐ ध्वनि एवं वंदे मातरम् के साथ समारोह का औपचारिक आरंभ हुआ। मंचासीन अतिथियों द्वारा भगवान राम एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्पण किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यकर्ता उमा गोयल द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. श्याम अग्रवाल, केंद्रीय कोषाध्यक्ष – विश्व हिन्दू परिषद एवं सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति में अनुशासन अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने सेवा, संगठन और राष्ट्रनिष्ठा पर बल देते हुए कहा कि ‘वनवासी कल्याण आश्रम चिकित्सा एवं शिक्षा के माध्यम से वनवासी समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। वर्तमान समय को उन्होंने स्वर्णिम अवसर बताते हुए आह्वान किया कि हम स्वार्थ त्यागकर अक्षम वर्ग का हाथ थामें ।
इसके पश्चात प्रधान वक्ता डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा कि वनवासी समाज ने सदैव समाज और संस्कृति के लिए बलिदान दिया है, माँगा नहीं है । वैदिक ऋषियों ने अरण्य संस्कृति को चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला बताया है। सभ्यता का विकास वन से नगर की ओर हुआ, किंतु हमारे अधिकांश ग्रंथ वनों में ही रचे गए । भरत का चित्रकूट आगमन, भारद्वाज ऋषि, कण्व ऋषि एवं शकुंतला, हनुमान, नल-नील और जटायु जैसे उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने वनवासी समाज के ज्ञान, संगठन कौशल और त्याग की परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हम चिरंतन सनातन संस्कृति के उत्तराधिकारी हैं और इस ऐतिहासिक योगदान को समझना आवश्यक है।
अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री प्रमोद गुप्ता ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मन की शक्ति से ही तन आगे बढ़ता है । उन्होंने भगवान महादेव एवं पूजनीय हनुमान के उदाहरण देते हुए आत्मबल, अनुशासन और सेवा भावना को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी ।
कार्यक्रम में “हारे का सहारा बर्बरीक श्याम हमारा” शीर्षक से एक अभिनव एवं मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसका निर्देशन श्रीमती शुभ्रा अग्रवाल तथा लेखन श्रीमती निशा अग्रवाल एवं श्रीमती सुनीता जैन द्वारा किया गया । समूचा आयोजन गरिमा, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रहा ।












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