मानव जीवन में शिक्षा एवम संस्कार के  प्रथम गुरु माता – पिता हैं – साध्वी ऋषभरत्ना श्रीजी 

कोलकाता । श्री वर्धमान जैन संघ में आचार्य मुक्तिप्रभ  सूरीश्वर महाराज, आचार्य विनीतप्रभ सूरीश्वर महाराज आदि ठाणा के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया । आचार्य मुक्तिप्रभ सूरीश्वर ने कहा चातुर्मास में गाँव, नगर, महानगर में प्रवास कर जैनाचार्य, मुनि, साध्वी धर्म की शिक्षा के साथ संस्कारित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं । बंग दीपिका साध्वी जिनरत्ना श्रीजी, धर्मरत्ना श्रीजी आदि ठाणा एवम श्रावक – श्राविकाओं ने आस्था, भक्ति भावना से गुरु पूजन किया । साध्वी ऋषभरत्ना श्रीजी ने कहा मानव जीवन में शिक्षा एवम  संस्कार के प्रथम गुरु माता – पिता हैं । धर्मगुरु, धर्माचार्य तथा शिक्षक के सानिध्य में धर्म के अनुकूल आचरण करने तथा उच्च शिक्षा प्राप्त कर कैरियर, व्यापार में सफलता की प्रेरणा मिलती है । भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु की मान्यता ईश्वर के समकक्ष है । गुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर मानव जीवन की सार्थकता के लिए हम अग्रसर हों, यही गुरु पूर्णिमा का सन्देश है । दिलीप दुगड़ ने भजनों की प्रस्तुति से गुरु वंदना की । समाजसेवी शांतिलाल रामपुरिया, महेन्द्र कुमार रामपुरिया, विजय चन्द बैद, महेन्द्र सुराणा, मुल्तान चन्द सुराणा, महेन्द्र डागा, विनीत रामपुरिया, चन्द्र कुमार कोचर, अशोक सुराणा, अशोक बांठिया, सुरेश बांगानी एवम कार्यकर्ता सक्रिय रहे । संचालन मुल्तान चन्द सुराणा ने किया ।

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