उत्तर हावड़ा ( राष्ट्र रंग ) | युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी स्वर्णरेखाजी के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व के अन्तर्गत अष्टात्मिक आराधना में तप जप, संयम- साधना का क्रम सुव्यवस्थित रूप से चला। मात्र पयुषण काल में अठाई से लेकर तेरह की तपस्या की संख्या लगभग इक्कावन से ऊपर थी, ढाई सौ प्रत्याख्यान के क्रम में ढाई हजार से ऊपर प्रन्याख्यान चले तो पयुर्षण में अष्टम भक्त (तेला) भी सौ से ऊपर थे। अखंड जप के क्रम में भी एक साथ पचास पचास व्यक्तियों की संभागिता आध्यात्मिक जागरुकता को दर्शाने वाली थी। कोलकाता वासियों के लिए ‘महाश्रमण- समवसरण जो अपनी विशालता, रमणीयता से सबको आकर्षित कर रहा था, वह भी छोटा प्रतीत होने लगा। साध्वी श्री जी के श्रम का रंग सबकी आँखों में तैर रहा था तो कार्यकर्त्ताओं का उत्साह, जागरूकता, पुरुषार्थ, कर्महता का नजारा व्यवस्था पक्ष को मजबूत बनाये हुए था। कार्यक्रम को अंजाम देने स्थानीय सभा अध्यक्ष राकेश जी संचेती, के साथ संयोजक श्रीमान बुधमल लुनिया के संयोजकत्व दायित्व एवं सभा मंत्री सुरेन्द्र जी बोथरा, तेयुप अध्यक्ष संदीप डागा, महिला मंडल अध्यक्षा अलकाजी सुराणा, अणुव्रत समिति हावड़ा, के अध्यक्ष मनोज जी सिंघी, टी. पी. अध्यक्ष विक्रम सेठिया एवं सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अथक परिश्रम करके भव्यता प्रदान की।
अष्टाविक आराधना में अद्भूत उत्साह दिखा: उत्तर हावडा में












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