अखिलेश यादव को अयोध्या के संत स्वामी राजकुमार दास की खुली चुनौती

बोले :-

  1. हिम्मत है तो अयोध्या से चुनाव लड़कर देख लो
  2. योगी जी पर टिप्पणी का परिणाम भुगतना होगा
  3. 2027 में फिर से आ रहे हैं योगी आदित्यनाथ

अयोध्या : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ललकारने और कथित तौर पर ओछी टिप्पणी करके समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रीधाम अयोध्या के संत समाज को रुष्ट कर दिया है। संतों में भारी रोष का ताजा उदाहरण अयोध्या स्थित जानकीघाट के प्रतिष्ठित वैष्णव पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख और श्रीराम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास जी महाराज का एक तीखा बयान है। राजकुमार दास जी का बयान, जिन्हें आयोध्यावासी पूज्य अधिकारी जी के नाम से ज्यादा जानते हैं, इन दिनों राजनीतिक हलकों में जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी है। संत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव तो दूर, उनके स्वर्गीय पिता भी कभी अयोध्या से चुनाव लड़ने की कल्पना नहीं कर सकते थे। योगी जी निःस्वार्थ भाव से जनसेवा में जुड़े संत हैं और संत का अपमान करने की कुचेष्टा करने वालों को अयोध्या ही नहीं पूरे प्रदेश के लोग सबक सिखाएंगे। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रहे हैं और यदि अयोध्या के सैकड़ों साधु-संत प्रचार के मैदान में उतर गए, तो विपक्ष का कोई भी नेता उनके सामने टिक नहीं सकेगा।

स्वामी राजकुमार दास का यह आक्रामक बयान सपा मुखिया द्वारा आठ अक्टूबर को अयोध्या में एक भागवत कथा के मंच से मुख्यमंत्री को दी गई उस चुनौती के जवाब में आया है, जिसमें अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को अयोध्या सीट से स्वयं चुनाव लड़कर दिखाने की बात कही थी। वीडियो के अंत में आध्यात्मिक संदेश देते हुए संत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वधर्म का निष्ठा और ईमानदारी से पालन करना चाहिए, क्योंकि अपने धर्म में जीना और मरना ही शास्त्रों में सर्वोपरि बताया गया है। इस बयान के सामने आने के बाद रामनगरी में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है तथा सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सपा खेमा इस पर क्या रुख अपनाता है।

लगभग चौवन वर्षीय स्वामी राजकुमार दास जी अयोध्या के संत समाज में अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। बताया जाता है कि राम जन्मभूमि आंदोलन में हजारों कारसेवकों को पुलिस की गोली से बचाने में उनकी बड़ी भूमिका थी। श्रीरामवल्लभाकुंज के पीठाधीश्वर होने के साथ-साथ वे राम मंदिर धार्मिक समिति के सक्रिय सदस्य, नित्य सरयू महाआरती समिति के संरक्षक तथा कई अन्य प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक न्यासों के शीर्ष पदों पर आसीन हैं। देश भर के संत समाज में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है और हाल ही में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह व योग गुरु बाबा रामदेव के मध्य उपजे तल्ख गतिरोध को सुलझाने में भी उनकी मध्यस्थता की अहम भूमिका रही थी।

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