कोलकाता । निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर (राजगुरु, बीकानेर) स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने ब्रह्मलीन विश्वदेवानंद महाराज के निर्वाण दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा स्वामी विश्वदेवानंद जी का व्यक्तित्व, कृतित्व श्रद्धालुओं के लिये प्रेरक है । भारतीय संस्कृति अध्यात्म से जोड़ती है, जबकि पाश्चात्य संस्कृति भौतिकवादी है । सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग एवम वर्तमान युग के संदर्भ में कहा सतयुग से आज तक ऋषियों, महापुरुषों ने भक्तों का मार्गदर्शन किया है । उन्होंने मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहा जो व्यक्ति मन, कर्म, विवेक, वाणी से मर्यादित आचरण करता है, उस व्यक्ति का मानव जीवन सार्थक है । महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मानंद महाराज, सत्संग भवन के ट्रस्टी पण्डित लक्ष्मीकांत तिवारी, आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, दीपक मिश्रा, सत्यनारायण भट्टर, प्रदीप आसोपा, मुकेश शर्मा, पार्षद मीना पुरोहित, डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी, शकुन्तला तिवारी, शंकर बक्श सिंह, बुलाकीदास मिमानी, राजकुमार बोथरा एवम श्रद्धालु भक्तों ने सत्संग भवन में ब्रह्मलीन विश्वदेवानंद जी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की । वक्ताओं ने कहा ब्रह्मलीन स्वामी विश्वदेवानंद जी के बताए मार्ग पर चलना, अनुसरण करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी । आकाश शर्मा ने गुरु वंदना के भजन सुना कर भाव विभोर किया । रजनीश पारोलिया, सुनील दीक्षित, पंडित लालजी मिश्रा, सुनीता नाहटा, शंकर शर्मा, पुरुषोत्तम तिवारी, अशोक शुक्ला, अशोक तिवारी, संजय गोलछा, राजू शर्मा, अभय पांडेय एवम श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे ।
मन, कर्म, विवेक, वाणी से मर्यादित आचरण करें — स्वामी विशोकानंद भारती ।












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