कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने SIR में 27 लाख नाम कटने के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। अधिकारी ने ममता पर आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद वो अपनी नाकामियों का दोष दूसरों पर मंढ रही हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट से 27 लाख नाम कटने के लिए बीजेपी या चुनाव आयोग नहीं, बल्कि खुद ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये नाम न्यायिक अधिकारियों ने हटाए हैं। ये सब सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के तहत किया गया, जो खुद ममता बनर्जी की ओर से दायर एक मामले में आए थे।
केरलम में SIR अच्छा, तो बंगाल में खराब क्यों?
शुभेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को मुख्य रूप से वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के जनादेश को लेकर राजनीतिक लड़ाई के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा- अगर केरलम में एसआईआर अच्छा है, तो पश्चिम बंगाल में यह खराब क्यों है? हमने 208 सीट जीती हैं, जबकि दोनों पक्षों (तृणमूल कांग्रेस और उसके सहयोगियों) के पास 80 सीट हैं। ममता बनर्जी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब ममता बनर्जी अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की की कोशिश कर रही हैं। तीनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि एसआईआर से जुड़े फैसले किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिये थे।
बिखर गया है विपक्ष
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हाल ही में श्रीरामपुर में विपक्षी दल की रैली हुई जिसमें कोर्ट की इजाजत के बाद भी केवल 150 लोग ही शामिल हुए। इससे यह साफ होता है कि विपक्ष के पास अब कोई जनसमर्थन नहीं बचा है। 15 साल तक मुख्यमंत्री रहीं और छह बार सांसद रहीं नेता का प्रभाव अब केवल पांच महीनों में खत्म होता दिख रहा है।
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी पर दी सफाई
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद होने की खबरों के बाद हुई अपनी पहली बैठक के बाद आयोग ने एक बयान में कहा कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गये पत्र प्रतिनियुक्ति पर आये एक अधिकारी से संबंधित थे, न कि नीतिगत या सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग से जुड़े मामलों से। चुनाव आयोग (EC) ने स्पष्ट किया है कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ संलग्न किए जाने वाले घोषणा पत्र (Declaration) को सुप्रीम कोर्ट ने वैध और सही ठहराया है।














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