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राहुल गांधी में कांग्रेस ही नहीं आम भारतीय अब भी राजीव गांधी की झलक ढूंढते हैं। राहुल अपने पिता की तरह दिखते हैं तो कभी लगता है कि वह उनके कई फैसलो को अब वैसा नहीं लेते जैसा राजीव के जमाने में लेना चाहिए था।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 30वीं पुण्यतिथि है। इस दिन को कांग्रेस पार्टी की ओर से सेवा और सद्भावना के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। राहुल गांधी ने ट्विटर पर अपने पिता की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा सत्य, करुणा, प्रगति। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 की रात को तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमलावर के द्वारा हत्या कर दी गई थी। यह संभवत: पहला आत्मघाती विस्फोट था जिसमें किसी बड़े नेता की जान गयी थी। राहुल गांधी में कांग्रेस ही नहीं आम भारतीय अब भी राजीव गांधी की झलक ढूंढते हैं।  राहुल अपने पिता की तरह दिखते हैं तो कभी लगता है कि वह उनके कई फैसलो को अब वैसा नहीं लेते जैसा राजीव के जमाने में लेना चाहिए था। राहुल में राजीव का नई तकनीक के प्रति प्रेम, नवीन प्रबंधन नीती, असहज फैसले लेने का साहस और प्रयोगवादिता देखने को मिलती है। राजीव गांधी के साफ्ट हिदुत्व वाले एंगल को भी राहुल गांधी कई बार मंदिर दौरे, भगवान शिव के अनन्य भक्त बताए जाने के जरिए टच करते रहे हैं। 

राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे। उन्हें राजनीति पसंद नहीं थी। पढ़ाई करने के बाद पायलट बनकर अपनी ज़िन्दगी जी रहे थे, लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें मजबूरन राजनीति में आना पड़ा। संजय गांधी जिंदा होते तो शायद राजीव गांधी राजनीति में नहीं आते। राहुल गांधी को लेकर भी राजनीति के प्रति विशेष रूचि नहीं रखने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा बार-बार छुट्टी मनाने के लिए विदेश यात्रा को लेकर भी उन पर विरोधियों द्वारा निशाना साधा जाता रहा है। 

ये 1986 की बात है। मां इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी राजनीतिक के दांव-पेंच सीख रहे थे। इसी बीच मध्य प्रदेश के इंदौर की शाह बानो का केस चर्चा में आया. शाह बानो के शौहर मशहूर वकील मोहम्मद अहमद खान ने 43 साल साथ रहने के बाद तीन तलाक दे दिया। शाह बानो पांच बच्चें के साथ घर से निकाल दी गईं। शादी के वक्त तय हुई मेहर की रकम तो अहम खान ने लौटा दी, लेकिन शाह बानो हर महीने गुजारा भत्ता चाहती थीं। उनके सामने कोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। कोर्ट ने फैसला शाह बानो के पक्ष में सुनाया और अहमद खान को 500 रुपए प्रति महीने गुजारा भत्ता देने का फैसला सुना दिया। शाह बानो की इस पहल ने बाकी मुस्लिम महिलाओं के लिए कोर्ट जाने का रास्ता खोल दिया, जिससे मुस्लिम समाज के पुरुष बेहद नाराज हुए। शाह बानो केस याद होगा जब इसी केस पर राजीव गांधी की सरकार ने अपना प्रोगरेसिव चेहरा दिखाया था। अपने गृह राज्य मंत्री आरिफ मोहम्मद खान को आगे किया था। खान ने अपने विचारों को लोकसभा में खुलकर रखा था। आरिफ मोहम्मद ने मौलाना आजाद के विचारों से अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा था कि कुरान के अनुसार किसी भी हालत में तालकशुदा औरत की उचित व्यवस्था की ही जानी चाहिए। हम दबे हुए लोगों को ऊपर उठाकर ही कह सकेंगे कि हमने इस्लामिक सिद्धांतों का पालन किया है और उनके साथ न्याय किया है। कंट्टरपंथियों के दबाव में राजीव गांधी ने अपने कदम सिर्फ वापस ही नहीं खींचे बल्कि धारा की विपरीत दिशा में कदम बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही पलट दिया। तब तो धर्म की राजनीति कर के राजीव गांधी ने मुस्लिमों को खुश कर दिया था, लेकिन साल 2019 तक उनकी उस गलती का खामियाजा न सिर्फ मुस्लिम महिलाएं भुगत रही थीं, बल्कि कांग्रेस भी भुगतती रही। वोट बैंक साधने की ऐसी ही कोशिश 2021 में भी कांग्रेस पार्टी की ओर से देखने को मिली जब असम चुनाव में जीत के लिए मुस्लिम नेता और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट केनेता बदरुद्दीन अजमल के साथ गठबंधन कर लिया। हालांकि इस चुनाव में ये गठबंधन भी पार्टी को सत्ता नहीं दिला सकी।

राजीव गांधी के कई बयान हैं जो वर्तमान दौर में भी कांग्रेस पार्टी का पीछा नहीं छोड़ती है। इंदिरा गांधी की मौत के बाद बोट क्लब की रैली में कहा, ‘गुस्से में उठाया गया कोई भी कदम देश के लिए घातक होता है। कई बार गुस्से में हम जाने-अनजाने ऐसे ही लोगों की मदद करते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं’। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो कहा वो चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि हमें मालूम है कि भारत की जनता को कितना क्रोध है, कितना ग़ुस्सा है और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है। जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है। या फिर नवग्रह मैदान में 21 मिनट का भाषण दिया था, जिसमें कहा था कि ‘दिल्ली से एक रुपया गांव के लिए भेजा जाता है तो गांव तक सिर्फ 10 पैसे ही पहुंचते हैं। 90 पैसे का भ्रष्टाचार हो जाता है। राहुल गांधी भी अक्सर अपने बयानों के जरिये विरोधियों के निशाने पर आ जाते हैं और तो और चौकीदार चोर है वाले बयान को लेकर अवमानना भी झेलनी पड़ी और माफी भी मांगनी पड़ी। 

लेकिन कहा जाता है कि राजीव गांधी सारे मुद्दों पर नहीं बोलते थे। लेकिन जिन मुद्दों पर बातें करते थे उसमें संजीदगी दिखती थी। लेकिन राहुल गांधी कई बार अपने बयानों की वजह से आकर्षण की बजाए परिहास का कारण भी बन गए।  

कुल मिलाकर, राहुल गांधी की तुलना भले ही उनके पिता राजीव गांधी से की जाती रही हो लेकिन वो अगर ग्रैंड ओल्ड पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष और अपनी मां सोनिया गांधी के राजनीतिक फॉर्मूले पर अमल करें तो उनकी राजनीतिक राह आसान हो सकती है। 

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