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नारद स्टिंग मामले में सीबीआइ द्वारा सोमवार सुबह नाटकीय ढंग से राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री सुब्रत मुखर्जी व फिरहाद हकीम समेत तृणमूल विधायक मदन मित्रा एवं पूर्व मंत्री शोभन चटर्जी की गिरफ्तारी के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जांच एजेंसी के कार्यालय में जाकर घंटों बैठी रहीं।

राष्ट्र रंग, कोलकाता। नारद स्टिंग मामले में सीबीआइ द्वारा सोमवार सुबह नाटकीय ढंग से राज्य के दो वरिष्ठ मंत्री सुब्रत मुखर्जी व फिरहाद हकीम समेत तृणमूल विधायक मदन मित्रा एवं पूर्व मंत्री शोभन चटर्जी की गिरफ्तारी के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जांच एजेंसी के कार्यालय में जाकर घंटों बैठी रहीं। वहां काफी विरोध जताने के बाद करीब छह घंटे बाद मुख्यमंत्री सीबीआइ कार्यालय से बाहर निकलीं।इसके बाद सीबीआइ अधिकारियों ने भी थोड़ी राहत की सांस ली।

दरअसल, तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारी की खबर के तुरंत बाद पार्टी सुप्रीमो व मुख्यमंत्री सुबह लगभग 10:48 बजे ही निजाम पैलेस स्थित सीबीआइ के दफ्तर पहुंच गईं थी और तृणमूल नेताओं को रिहा करने की मांग की। ममता ने वहां पहुंचते ही खुली चुनौती देते हुए यह भी कहा कि सीबीआइ को मुझे भी गिरफ्तार करना होगा, वरना मैं यहां से नहीं निकलूंगी। इसके बाद सीबीआइ अधिकारियों के बार-बार अनुरोध के बावजूद मुख्यमंत्री वहां से जाने को तैयार नहीं थी। लेकिन दोपहर लगभग 4:30 बजे ममता लगभग छह घंटे बाद सीबीआइ कार्यालय से बाहर निकल गईं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के बड़ी संख्या में समर्थक अभी भी निजाम पैलेस के बाहर जमे हुए हैं।

इस बीच खबर है कि सीबीआइ कार्यालय से ही ममता ने कैबिनेट की वर्चुअल बैठक भी की। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर दो बजे से कैबिनेट की बैठक पहले से निर्धारित थी। इस बीच तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारी का प्रकरण सामने आने के बाद चूंकि ममता घंटों सीबीआइ कार्यालय में ही बैठी रहीं, ऐसे में राज्य सचिवालय नवान्न की वजाय ममता ने वहीं से वर्चुअल माध्यम से बैठक कीं।

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में 12 मंत्री वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। गौरतलब है कि ममता के साथ तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी सहित कई और नेता भी घंटों सीबीआइ कार्यालय में बैठे रहे। ममता का आरोप है कि बिना कोई नोटिस दिए उनके नेताओं को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर हुआ है। उनका यह भी कहना है कि इसी मामले में भाजपा नेता मुकुल राय और सुवेंदु अधिकारी भी आरोपित हैं फिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई है।

बताते चलें कि इससे पहले साल 2019 में बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले के मामले में सीबीआइ की टीम जब कोलकाता के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को गिरफ्तार करने उनके के घर पर पहुंची थीं तब भी ममता ने वहां जाकर बाधा दिया था। सीबीआइ की कार्रवाई के खिलाफ ममता कोलकाता में धरने पर भी बैठ गईं थी। इसको लेकर काफी राजनीति हुई थी। वहीं, भाजपा का आरोप है कि ऐसा करके मुख्यमंत्री, अपराध करने वाले नेताओं को बचाने की कोशिश कर रही हैं।

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