बापू ने कहा था- मेरे लिए राम और रहीम एक ही है , रामराज्य का मतलब है ईश्वर का शासन

बापू ने कहा था- मेरे लिए राम और रहीम एक ही है , रामराज्य का मतलब है ईश्वर का शासन

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देशमें स्वाधीनता के आंदोलन के दौरान 1929 में महात्मा गांधी ने भोपाल का आतिथ्य स्वीकार किया था। वे वर्धा आश्रम से यहां आए थे। भोपाल प्रवास के दौरान राहत मंजिल और बेनजीर मैदान को सफेद खादी से सजाया गया था। यहां उन्होंने बेनजीर ग्राउंड पर एक बड़ी जनसभा में रामराज्य की अवधारणा को लेकर मुस्लिमों में फैली गलतफहमी और छुआछूत दूर करने का संदेश दिया था। वे यहां तीन दिन रुके थे। उनकी प्रार्थना सभा में गीता, कुरान और बाइबल के पवित्र संदेशों का वाचन किया गया था।

महात्मा गांधी अपने प्रिय शिष्य डॉ. एमए अंसारी के आग्रह पर 11 सितंबर 1929 को पहली बार भोपाल आए थे। इस अवसर पर उनके राहत मंजिल निवास को सफेद खादी से सजाया गया था। गौरतलब है कि कोहेफिजा से कुछ दूरी पर स्थित इस ऐतिहासिक इमारत का अब कोई अवशेष नहीं बचा है। गांधीजी भोपाल की आबोहवा और सामाजिक सौहार्द्र से खासे प्रभावित हुए थे। इसका उल्लेख उन्होंने बेनजीर मैदान में 12 सितंबर को हुई सभा में किया था

गांधीजी ने सभा में कहा – आपका प्रेम और स्नेह मुझे यहां तक ले लाया। मैं आप सभी का स्नेह पाकर अभिभूत हूं। रियासतों का जिक्र करते हुए हुए उन्होंने कहा था मेरी देसी नरेशों से कोई दुश्मनी नहीं है। मेरा विश्वास है कि देसी नरेश भी यदि पूरी तरह प्रयत्नशील हों तो देश में रामराज्य की स्थापना हो सकती है। मेरी राय में रामराज्य का अर्थ हिंदू राज्य नहीं है। रामराज्य से मेरा आशय ईश्वर का राज है। मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है। मेरे लिए तो सत्य और सत्कार्य ही ईश्वर है। कहा गया है कि रामराज्य में दरिद्र से दरिद्र व्यक्ति भी कम खर्च में और अल्प अवधि में न्याय प्राप्त कर सकता था। यदि देश में शासक और शासित ईश्वर पर भरोसा रखने वाले हों तो वह शासन दुनिया की सभी प्रजातंत्रीय व्यवस्थाओं से उत्तम होगा।

बेनजीर मैदान में गांधीजी की सभा में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। इस दौरान राहत मंजिल से सभा स्थल तक भीड़ जमा थी। सभा स्थल को चारों तरफ से खादी से सजाया गया था।

गांधीजी ने बेनजीर मैदान में सभा के दौरान लोगों से चंदा भी मांगा था। शिक्षण संस्था जामिया मिलिया के विस्तार के लिए उन्होंने नागरिकों से चंदा मांगा था। साथ ही चरखा संघ के लिए भी राशि देने की अपील की थी। गांधीजी को भोपाल में नागरिकों की ओर से 1035 रुपए की थैली भी भेंट की गई थी।

अपनी भोपाल यात्रा के दौरान महात्मा गांधी का मोढ़ समाज की बगिया में सम्मान भी हुआथा। यहां उन्हें 501 रुपए की राशि आंदोलन के लिए भेंट की गई थी। वे गुजराती वणिक मोढ़ समाज के आमंत्रण पर समाज की बगिया में आए थे। वे यहां हुए शानदार स्वागत और आयोजन से काफी प्रभावित हुए। इस मौके पर उनके साथ जमनालाल बजाज, महादेव देसाई, पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जैसी शख्सियतें भी थीं। बापू के आगमन के विवरण को लेकर यहां एक पट्टिका भी लगी है।

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