परोपकार ही जीवन की सार्थकता : रवि पोद्दार

परोपकार ही जीवन की सार्थकता : रवि पोद्दार

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भारतीय संस्कृति ही श्रेष्ठ, पश्चात संस्कृति का न करें अनुसरण

रवि पोद्दार ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की अत्यन्त प्राचीन और श्रेष्ठ संस्कृति है। हमें पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण की बजाय अपनी संस्कृति को समृद्ध बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। हमें चाहिए कि हम पुराने रीति-रिवाजों का आदर करें और अपनी मातृभाषा हिन्दी एवं राजस्थानी बोली को बढ़ावा दें। अपने खर्च को आमदनी के अनुसार रखें, आडंबर से दूर रहें और अपनी कमाई का एक हिस्सा परोपकार में जरुर लगाएं। अपने से कम समृद्ध रिश्तेदारों को आगे बढ़ने में मदद करें।    

उल्लेखनीय है कि 22 जनवरी 1950 को पिता श्री अनंदीलाल पोद्दार के यहां जन्में रवि पोद्दार भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के प्रबल पक्षधर रहे हैं और इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। जनसेवा एवं सामाजिक कार्यों में भी उनकी अग्रणी भूमिका रहती है। पिछले 20 वर्षों से पुर्तगाल के कांसुलेट रवि पोद्दार काशी विश्वनाथ सेवा समिति, अभिनव भारती हाईस्कूल, काली कमली वाला पंचायत क्षेत्र, ज्योतिर्मयी सहित तमाम अन्य संस्थाओं के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में संलग्न हैं। उद्योग-व्यापार क्षेत्र की बात करें तो वे अपने पेंट मैन्युफैक्चरिंग (चंद्रा पेंट्स), प्रॉपर्टी डेवलपर-एमुजमेंट पार्क एवं लाजिस्टिक सेक्टर में भी सफलता के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।       

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