मधुमेह रोगियों से लेकर माइग्रेन तक का उपचार करते हैं अंगूर

मधुमेह रोगियों से लेकर माइग्रेन तक का उपचार करते हैं अंगूर

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अंगूर एक ऐसा फल है, जिसे खाने के लिए बिल्कुल भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। बस जब भी मन किया, तुरंत खा लिया। वैसे यह खाने में जितना लाजवाब होता है, इसकी न्यूटिशन वैल्यू भी उतनी ही अधिक होती है। हालांकि बहुत से लोग इससे अनजान होते हैं। तो चलिए आज हम आपको अंगूर से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में बता रहे हैं−

अल्जाइमर का इलाज

आपको शायद पता न हो लेकिन अंगूर ब्रेन हेल्थ के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों को शुरूआत में ही रोकने में सक्षम है। ऐसा इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स के कारण होता है। इसलिए अगर आपको स्वयं को मस्तिष्क विकारों से बचाना है जो अंगूर का सेवन करना शुरू कर दीजिए।

अपच का उपचार

आज के समय में लोग जिस तरह किसी भी वक्त कुछ भी खा लेते हैं, उसके कारण पाचन संबंधी परेशानियां उत्पन्न होती है। अंगूर पेट की गर्मी को कम करता है और अपच को ठीक करता है। इसके लिए आप एक गिलास अंगूर के रस का सेवन करें। यह अपच के साथ−साथ पेट में सूजन व जलन को भी कम करेगा।

माइग्रेन से राहत

अगर आपको सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो एक गिलास अंगूर के रस का सेवन कीजिए। वहीं जिन लोगों को माइग्रेन की शिकायत रहती है, वे हर सुबह ताजे अंगूर के रस का सेवन करें। दरअसल, अंगूर में पाए जाने वाले एंटी−ऑक्सीडेंट्स सिरदर्द व माइग्रेन के उपचार के लिए बेहद प्रभावी तरीके से काम करते हैं।

लड़े स्तन कैंसर से

भारत में स्तन कैंसर के मामलों में हर दिन बढ़ोतरी होती जा रही है। इससे लड़ने में अंगूर आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आप बैंगनी रंग के अंगूर के रस का सेवन नियमित रूप से करें। दरअसल, अंगूर में एंटीमुटाजेनिक और एंटी−ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो हर तरह के कैंसर खासतौर से स्तन कैंसर से निपटने में प्रभावी माने गए हैं।

मधुमेह का इलाज

अंगूर खाने में भले ही मीठे हो लेकिन फिर भी मधुमेह पीडि़त व्यक्ति बेफ्रिक होकर इनका सेवन कर सकते हैं। इतना ही नहीं, अंगूर मधुमेह को रोकने में भी मददगार हैं। अंगूर में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो रक्त में शर्करा के स्तर को काम करता है, जिससे मधुमेह रोगियों को लाभ होता है।

दूर करे किडनी विकार

अंगूर गुर्दे संबंधी बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभदायक होता है। दरअसल, यह यूरिक एसिड की अम्लता को कम करते हैं। साथ ही वह सिस्टम से ही एसिड को भी कम करते हैं, जिसके कारण गुर्दे पर दबाव कम हो जाता है और व्यक्ति को गुर्दे संबंधी विकार होने की संभावना न के बराबर होती है।

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